जयपुर, 18 जुलाई/ नरेश गुनानी/राजस्थान में मरीजों को किफायती दरों पर जीवन रक्षक दवाएं उपलब्ध कराने के लिए राजस्थान मेडिकल सर्विस कॉरपोरेशन लिमिटेड (आरएमएससीएल) द्वारा अपनाई जा रही खरीद प्रणाली की भारत सरकार ने सराहना की है। भारत सरकार के रसायन और उर्वरक मंत्रालय के औषध विभाग के सचिव मनोज जोशी ने कहा कि इस सुदृढ़ व्यवस्था के माध्यम से रोगियों को गुणवत्तायुक्त दवाएं बेहद कम कीमत पर उपलब्ध हो रही हैं, जिससे आम जनता पर इलाज का आर्थिक भार काफी कम हुआ है।
शनिवार को शासन सचिवालय में मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास एवं आरएमएससीएल के उच्च अधिकारियों के साथ आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक में दवाओं की खरीद, गुणवत्ता नियंत्रण और वितरण व्यवस्था की व्यापक समीक्षा की गई।
हर स्तर पर चिकित्सा उपकरणों और दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता: मुख्य सचिव
बैठक के दौरान मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेशवासियों को सस्ती, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयासरत है। जिला अस्पतालों से लेकर उप-स्वास्थ्य केंद्रों तक प्रत्येक स्तर पर आवश्यक दवाओं और चिकित्सा उपकरणों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है, ताकि आमजन को समय पर बेहतर उपचार मिल सके।
डीवीडीएमएस (DVDMS) डैशबोर्ड पर राजस्थान देश में दूसरे स्थान पर
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने बैठक में बताया कि आरएमएससीएल के माध्यम से दवा वितरण केंद्रों पर बाजार भाव की तुलना में काफी कम कीमत पर गुणवत्तापूर्ण दवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। वर्तमान में प्रतिदिन 19 हज़ार केंद्रों के माध्यम से लगभग 3.60 लाख लोगों को दवाइयां वितरित की जा रही हैं। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार के प्रभावी प्रयासों का ही परिणाम है कि औषधि एवं टीका वितरण प्रबंधन प्रणाली (DVDMS) के केंद्रीय डैशबोर्ड पर मई माह के आंकड़ों के अनुसार राजस्थान पूरे देश में दूसरे स्थान पर काबिज है।
डबल-लेयर्ड क्वालिटी कंट्रोल से परखी जाती है दवाओं की शुद्धता
आरएमएससीएल के प्रबंध निदेशक पुखराज सैन ने प्रस्तुतीकरण (प्रेजेंटेशन) के माध्यम से दवाओं एवं चिकित्सा उपकरणों की खरीद प्रक्रिया, भंडारण, बाजार दरों से तुलना और गुणवत्ता नियंत्रण व्यवस्था की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने गुणवत्ता को लेकर कॉर्पोरेशन की नीति स्पष्ट करते हुए बताया:
- द्विस्तरीय गुणवत्ता परीक्षण: औषधियों एवं चिकित्सा उपकरणों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए उन्हें सप्लाई करने से पहले ‘डबल-लेयर्ड क्वालिटी कंट्रोल’ (द्विस्तरीय गुणवत्ता परीक्षण) से गुजारा जाता है।
- कंप्यूटरीकृत रैंडम प्रणाली: औषधि परीक्षण के लिए प्रयोगशालाओं (लैब्स) का चयन पूरी तरह कंप्यूटरीकृत रैंडम प्रणाली से होता है।
- अनिवार्य एनआईबी (NIB) टेस्ट: सभी जैविक (बायोलॉजिकल) उत्पादों के लिए एनआईबी परीक्षण अनिवार्य किया गया है।
- 10% नमूनों का पुनः परीक्षण: पैनलबद्ध प्रयोगशालाओं का नियमित निरीक्षण किया जाता है। गुणवत्ता की सतत निगरानी के लिए इन लैब्स द्वारा जांचे गए औषधि नमूनों में से 10 प्रतिशत नमूनों का रैंडम रूप से पुनः परीक्षण (री-टेस्ट) कराया जाता है, ताकि निर्धारित मानकों का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित हो सके।
बैठक में यह अधिकारी रहे उपस्थित
इस महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में वित्त (व्यय) विभाग की शासन सचिव टीना सोनी, चिकित्सा शिक्षा विभाग के आयुक्त बाबूलाल गोयल, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के मिशन निदेशक डॉ. रविप्रकाश, चिकित्सा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी तथा केंद्र सरकार के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।