गौरव कोचर
नई दिल्ली | 17 अप्रैल 2026
केंद्रीय आयुष मंत्री प्रतापराव जाधव ने आज नई दिल्ली में दो दिवसीय ‘आयुष चिंतन शिविर 2026’ का उद्घाटन किया। यह आयोजन आयुष नीति को सुदृढ़ करने, उसके प्रभावी क्रियान्वयन और स्वास्थ्य क्षेत्र में पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों की भूमिका को विस्तार देने के लिए केंद्र सरकार के दृढ़ संकल्प को प्रदर्शित करता है। 17 अप्रैल 2026 तक चलने वाले इस शिविर में आयुष क्षेत्र की भविष्य की रूपरेखा तैयार करने के लिए गहन समीक्षा और आत्ममंथन किया जा रहा है।

विकसित भारत 2047 और आयुष की भूमिका
उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए प्रतापराव जाधव ने कहा कि यह चिंतन शिविर आयुष क्षेत्र में नीतिगत दिशा को स्पष्ट करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ‘विकसित भारत 2047’ के दृष्टिकोण को साकार करने में आयुष एक निर्णायक भूमिका निभाएगा।
जाधव ने बताया कि सरकार का उद्देश्य प्रगति की समीक्षा करना और मौजूदा कमियों की पहचान कर एक व्यावहारिक रोडमैप तैयार करना है। उन्होंने ‘वन अर्थ, वन फैमिली, वन फ्यूचर’ और ‘हील इन इंडिया, हील बाय इंडिया’ के वैश्विक विजन के अनुरूप जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों से लड़ने में आयुष की बढ़ती प्रासंगिकता को रेखांकित किया।
प्रमुख घोषणाएँ और डिजिटल पहल
कार्यक्रम के दौरान आयुष क्षेत्र को अधिक सुलभ और आधुनिक बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए:
- व्हाट्सएप चैनल की शुरुआत: मंत्रालय और नागरिकों के बीच वास्तविक समय में संवाद और सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए आधिकारिक व्हाट्सएप चैनल लॉन्च किया गया।
- बीमा कवरेज और टोल-फ्री नंबर: आयुष उपचारों को अधिक वहनीय और पारदर्शी बनाने के लिए आयुष बीमा हेतु एक समर्पित टोल-फ्री नंबर (1800-11-0008) जारी किया गया।
- मानक दरों में संशोधन: ‘आयुष उपचारों के लिए बीमा कवरेज की मानक दरों में संशोधन’ से संबंधित दस्तावेज जारी किया गया, जिसका उद्देश्य दावों के निपटान की प्रक्रिया को सरल और मानक बनाना है।
महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU)
शिविर का एक मुख्य आकर्षण अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (AIIA) और जनरल इंश्योरेंस काउंसिल के बीच हुआ समझौता रहा। इस समझौते के तहत आयुष उपचारों के लिए बीमा कवरेज का विस्तार करने और दावों के निपटान तंत्र को बेहतर बनाने पर सहमति बनी है। यह कदम आयुर्वेद और अन्य पद्धतियों को मुख्यधारा के स्वास्थ्य बीमा में मजबूती से स्थापित करेगा।
आयुष मंत्रालय का दृष्टिकोण
आयुष सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने इस मंच को आत्ममंथन के लिए अनिवार्य बताया। उन्होंने कहा कि पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक विज्ञान के समन्वय से आयुष को वैश्विक स्तर पर पहुँचाया जा रहा है। वहीं, संयुक्त सचिव अलार्मेलमंगई डी. ने अनुसंधान और नवाचार में युवा पेशेवरों की भूमिका पर बल देते हुए इसे स्वास्थ्य क्षेत्र का एक मजबूत स्तंभ बताया।
पहले दिन के मुख्य सत्र
चिंतन शिविर के पहले दिन तीन तकनीकी सत्र आयोजित किए गए:
- समीक्षा सत्र: 2023 के पहले चिंतन शिविर के परिणामों और उन पर हुई कार्यवाही का विश्लेषण।
- ट्रेडिशन टू ट्रांसलेशन: पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक वैज्ञानिक मान्यता दिलाने और वैश्विक साझेदारी सुदृढ़ करने पर चर्चा।
- विधिक तैयारी: आयुष क्षेत्र के विस्तार के लिए नियामक ढांचे और विधिक प्रबंधन की रणनीतियों पर विचार।
यह शिविर आने वाले समय में साक्ष्य-आधारित अनुसंधान, डिजिटल नवाचार और अंतर-मंत्रालयी समन्वय के माध्यम से आयुष क्षेत्र को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का मार्ग प्रशस्त करेगा।