PPP मोड पर राजस्थान आयुष विभाग और दीनदयाल आयुर्वेद मिलकर करेंगे अत्याधुनिक संचालन
- भारत ने विश्व को दी आयुर्वेद, योग, गणित और विज्ञान की सौगात — विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी
- राजस्थान आयुर्वेद देश में अग्रणी, हम नया इतिहास रचेंगे — उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा
- केंद्रीय आयुष सचिव पद्मश्री वैद्य राजेश कोटेचा ने की राजस्थान के लिए 440 करोड़ रुपए की घोषणा
जयपुर / अजमेर / नरेश गुनानी
सावन का पहला सोमवार अजमेर के लिए बेहद शुभ साबित हुआ। अजमेर की ऐतिहासिक धरोहर रही आयुर्वेद रसायनशाला एक बार फिर से राजस्थान में पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली की प्रमुख धुरी बन गई है। यहां आधुनिक तकनीक से तैयार होने वाली दवाएं अब पूरे राज्य के सरकारी आयुर्वेद अस्पतालों में वितरित की जाएंगी।
राज्य सरकार की ‘राइजिंग राजस्थान’ नीति के तहत सार्वजनिक-निजी सहभागिता (PPP Mode) पर राजस्थान आयुष विभाग एवं दीनदयाल आयुर्वेद मिलकर इस रसायनशाला को अत्याधुनिक मशीनों के साथ संचालित करेंगे। इसके साथ ही यह इकाई प्रदेश की उन पांच प्रमुख रसायनशालाओं में शामिल हो गई है, जिनका ऑटोमेशन कर उन्हें उच्च स्तरीय तकनीक से लैस किया जा रहा है।
”भारतीय संस्कृति ने विश्व को दी अमूल्य धरोहर” — विधानसभा अध्यक्ष
अजमेर आयुर्वेद रसायनशाला के ऑटोमेशन के भव्य शुभारंभ समारोह में विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। उन्होंने अपने संबोधन में कहा:
“भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी प्राचीन ज्ञान परंपरा और आयुर्वेद है। भारतीय संस्कृति ने विश्व को विज्ञान, दर्शन, गणित, खगोल और आयुर्वेद जैसी अमूल्य सौगातें दी हैं। तक्षशिला और नालंदा जैसे प्राचीन विश्वविद्यालयों में पूरी दुनिया से विद्यार्थी अध्ययन करने आते थे। आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत पुनः उसी गौरवशाली वैश्विक प्रतिष्ठा को स्थापित कर रहा है।”
उन्होंने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा का आभार जताते हुए कहा कि यह परियोजना केवल एक रसायनशाला का आधुनिकीकरण नहीं है, बल्कि हमारी प्राचीन परंपरा और भविष्य की आधुनिक तकनीक के बीच एक सशक्त सेतु है।
लोकल टू ग्लोबल बन रहा आयुर्वेद — उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा
समारोह को संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा ने कहा कि कोविड-19 महामारी के दौरान आयुर्वेद की उपयोगिता सिद्ध हुई है। आज आयुर्वेद, योग और आयुष को वैश्विक पहचान मिल चुकी है और ‘लोकल टू ग्लोबल’ की अवधारणा साकार हो रही है। बजट घोषणा के तहत अजमेर सहित प्रदेश की पांचों आयुर्वेद रसायनशालाओं का पूर्ण ऑटोमेशन किया जा रहा है, जिससे औषधियों की गुणवत्ता और उत्पादन क्षमता में अभूतपूर्व वृद्धि होगी।
राजस्थान को 440 करोड़ रुपए की स्वीकृति: आयुष मंत्रालय
कार्यक्रम में विशेष रूप से मौजूद भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के सचिव एवं पद्मश्री वैद्य राजेश कोटेचा ने महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं:
- राजस्थान के लिए बजट: चालू वित्तीय वर्ष में केंद्र सरकार की ओर से राजस्थान को आयुष क्षेत्र के लिए 440 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए हैं।
- विश्वविद्यालय विकास: राजस्थान में आयुर्वेद विश्वविद्यालय के बुनियादी ढांचे और शोध विकास के लिए केंद्र सरकार 70 करोड़ रुपए की अतिरिक्त सहायता उपलब्ध कराएगी।
- 800% की वृद्धि: बीते वर्षों में देश में आयुर्वेद क्षेत्र के दायरे और बजट में लगभग 800 प्रतिशत की ऐतिहासिक वृद्धि हुई है। वर्तमान में देशभर में लगभग 3 करोड़ मरीज आयुर्वेद चिकित्सा से स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं।
उच्च स्तरीय आपूर्ति और गुणवत्ता पर जोर
आयुष विभाग के शासन सचिव सुबीर कुमार ने बताया कि पीपीपी मॉडल के माध्यम से राज्य में गुणवत्तापूर्ण उत्पादन प्रणाली और सुदृढ़ आपूर्ति व्यवस्था विकसित की जा रही है, ताकि प्रदेश के प्रत्येक नागरिक तक प्रामाणिक आयुर्वेदिक दवाएं पहुंच सकें।
कार्यक्रम के अंत में आयुर्वेद निदेशक आनंद शर्मा ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया। समारोह में संयुक्त निदेशक ज्योति ककवानी, एमडीएस यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. सुरेश अग्रवाल और दीनदयाल आयुर्वेद के पदाधिकारियों समेत आयुष क्षेत्र के विशेषज्ञ व गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।