आनासागर झील में नालों का गंदा पानी गिराने पर सख्ती, नगर निगम अजमेर पर NGT ने ठोका 38 करोड़ से ज्यादा का जुर्माना

आनासागर झील में नालों का गंदा पानी गिराने पर सख्ती, नगर निगम अजमेर पर NGT ने ठोका 38 करोड़ से ज्यादा का जुर्माना

(हरिप्रसाद शर्मा) नरेश गुनानी। टेलीग्राफ टाइम्स 
अजमेर। शहर की शान मानी जाने वाली ऐतिहासिक आनासागर झील को गंदे नालों के पानी और प्रदूषण से बचाने के लिए राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) ने बड़ा कदम उठाया है। एनजीटी ने नगर निगम अजमेर पर 38 करोड़ 70 लाख 75 हजार रुपये का भारी-भरकम जुर्माना लगाया है। प्राधिकरण ने निगम को आदेश दिया है कि यह राशि 60 दिनों के भीतर जमा करवाई जाए। तय समय पर भुगतान न करने की स्थिति में हर महीने डेढ़ प्रतिशत अतिरिक्त पेनल्टी भी चुकानी होगी।

स्थानीय लोगों को झेलनी पड़ रही थी परेशानी

भारतीय पब्लिक लेबर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बाबूलाल साहू ने बताया कि झील में लंबे समय से नालों का गंदा पानी गिर रहा था। इससे झील का जल प्रदूषित हो रहा था, चारों ओर दुर्गंध फैल रही थी और स्थानीय लोगों को बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया था। इस गंभीर मुद्दे को लेकर बाबूलाल साहू ने मार्च 2023 में एनजीटी में परिवाद दायर किया था।

निगम के दावे पर उठे सवाल

सुनवाई के दौरान नगर निगम की ओर से अदालत में शपथपत्र दिया गया कि आनासागर झील में गिरने वाले सभी नालों को पैक कर दिया गया है। लेकिन वास्तविक स्थिति जानने के लिए एनजीटी ने एक टीम गठित की, जिसमें पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड और राजस्थान पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण मंडल के अधिकारी शामिल थे।

निरीक्षण में खुली पोल – 13 नाले अब भी गिर रहे झील में

टीम ने 30 जुलाई 2025 को स्थल निरीक्षण किया। जांच में सामने आया कि नगर निगम के दावों के बावजूद 13 नाले अब भी सीधे आनासागर झील में गिर रहे हैं। टीम की रिपोर्ट के आधार पर एनजीटी ने नगर निगम की लापरवाही मानते हुए 16 अप्रैल 2025 को यह जुर्माना लगाया।

पर्यावरण संरक्षण के लिए अहम फैसला

बाबूलाल साहू ने कहा कि एनजीटी की यह कार्रवाई पर्यावरण संरक्षण के लिहाज से बेहद अहम है और साथ ही यह नगर निगम की जिम्मेदारियों पर भी बड़ा सवाल खड़ा करती है। आनासागर झील अजमेर की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहर है। इसमें गंदे नालों का गिरना न केवल झील की खूबसूरती को नष्ट करता है, बल्कि स्वास्थ्य और पर्यावरण पर भी गंभीर खतरा उत्पन्न करता है।

अब जिम्मेदारी निभाने की दरकार

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर समय रहते नगर निगम ठोस कदम नहीं उठाता तो झील की स्थिति और खराब हो सकती है। एनजीटी के आदेश के बाद अब नगर निगम पर यह जिम्मेदारी है कि वह जुर्माना समय पर अदा करे और झील में नालों का पानी गिरने से रोकने के लिए ठोस योजना लागू करे।

 

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