रिपोर्ट: योगेश शर्मा, जयपुर
जयपुर। राजस्थान ग्रामीण आजीविका विकास परिषद (राजवीका) और कमला पोद्दार संस्थान (KPG) NIF ग्लोबल जयपुर के साझा प्रयासों से ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण की एक नई इबारत लिखी गई है। ‘आत्मनिर्भर धागे’ शीर्षक के तहत आयोजित छह दिवसीय गहन प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन केपीजी कैंपस में एक भव्य फैशन शोकेस के साथ हुआ। इस पहल ने न केवल स्वयं सहायता समूह (SHG) की महिलाओं के कौशल को निखारा, बल्कि उन्हें आधुनिक बाजार की चुनौतियों के लिए भी तैयार किया।
हुनर और आधुनिकता का संगम
1 से 6 अप्रैल तक चले इस विशेष प्रशिक्षण शिविर में 35 स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने भाग लिया। इस दौरान केपीजी के विशेषज्ञ प्रशिक्षकों और विद्यार्थियों ने महिलाओं को मेंटरशिप प्रदान की। प्रशिक्षण का मुख्य केंद्र पारंपरिक कला को आधुनिक डिजाइन तकनीकों के साथ जोड़ना था। महिलाओं ने व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करते हुए निम्नलिखित उत्कृष्ट उत्पाद तैयार किए:
- टाई-एंड-डाई साड़ियां: पारंपरिक रंगों और पैटर्न का नया स्वरूप।
- आधुनिक परिधान (Floy Silhouettes): समकालीन फैशन के अनुरूप कट और डिजाइन।
- एप्लिक दुपट्टे व क्विल्टेड बैग: बारीक कारीगरी और मजबूती का बेजोड़ उदाहरण।
फैशन शो में दिखा आत्मविश्वास
प्रशिक्षण का समापन एक ग्रैंड फिनाले फैशन शो के साथ हुआ, जहाँ महिलाओं द्वारा तैयार उत्पादों को प्रदर्शित किया गया। यह मंच इस बात का गवाह बना कि कैसे सही मार्गदर्शन मिलने पर ग्रामीण शिल्पकार ‘सस्टेनेबल डिजाइन’ की बारीकियों को अपनाकर वैश्विक स्तर का उत्पाद तैयार कर सकते हैं। कार्यक्रम में राजवीका की परियोजना निदेशक सुश्री प्रीति सिंह, केपीजी के निदेशक अभिषेक पोद्दार, रोमा पोद्दार और राजवीका की स्टेट प्रोजेक्ट मैनेजर डॉ. रमनिका कौर ने उपस्थित होकर प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया।
‘उन्नति सेल’ के जरिए सशक्तिकरण
यह पूरी पहल राजवीका के ‘उन्नति सेल’ के अंतर्गत संचालित की गई है। इस सेल का प्राथमिक उद्देश्य गैर-कृषि आजीविका (नॉन-फार्म लाइवलीहुड) से जुड़ी महिलाओं को सशक्त बनाना है।
प्रमुख लक्ष्य:
- ब्रांडिंग, पैकेजिंग और डिजाइन में सुधार लाना।
- शिल्पकारों और आधुनिक बाजारों के बीच की दूरी को कम करना।
- उद्योग जगत और शैक्षणिक संस्थानों के बीच समन्वय स्थापित करना।
स्वावलंबन की ओर बढ़ते कदम
पिछले 27 वर्षों से डिजाइन शिक्षा में अग्रणी कमला पोद्दार संस्थान ने इस कार्यक्रम के माध्यम से पारंपरिक शिल्प को संरक्षित करने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया है। संस्थान के निदेशक अभिषेक पोद्दार ने कहा कि यह पहल महिलाओं को केवल कौशल सिखाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें स्थायी आजीविका के अवसर प्रदान कर स्वावलंबी बनाने की एक प्रेरणादायक यात्रा है।
राजवीका का लक्ष्य ऐसे रणनीतिक सहयोग के माध्यम से भविष्य में और भी बड़े स्तर के उद्यम विकसित करना है, ताकि राजस्थान की ग्रामीण कला को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिल सके।