जैन धर्म जीवन जीने की कला, 24 तीर्थंकरों ने मानव जाति को दिखाया सही मार्ग
राज्य सरकार जैन तीर्थों के विकास के लिए प्रतिबद्ध – मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री को ‘मातृ भू-सेवक’ की मानद उपाधि से अलंकृत
नरेश गुनानी
जयपुर, 27 नवम्बर।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि परम पूज्य आचार्य सुंदर सागर जी महाराज ज्ञान, अहिंसा और करुणा का दीप प्रज्वलित कर समाज को सही दिशा प्रदान कर रहे हैं। उनका जीवन त्याग, तपस्या, संयम और करूणा का अद्भुत संगम है। मुख्यमंत्री गुरुवार को सांगानेर कैम्प कार्यालय में आयोजित आचार्य सुंदर सागर जी महाराज की दिव्य देशना कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार सभी धर्मों के विकास और संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है और जैन मुनियों के उपदेश समाज को नैतिक मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं। उन्होंने लोगों से आव्हान किया कि वे उपदेशों को केवल सुनें ही नहीं, बल्कि अपने व्यवहार और जीवन में भी उतारें।

मुख्यमंत्री ने की जैन मुनियों की पद वंदना
कार्यक्रम से पूर्व मुख्यमंत्री आदिनाथ मंदिर एसएफएस मानसरोवर पहुंचे, जहां उन्होंने दर्शन कर प्रदेश की शांति, समृद्धि और मंगलकामना की। उन्होंने सभी संतों की पद वंदना करते हुए उनका हाथ थामा और आदिनाथ मंदिर से सांगानेर कैम्प कार्यालय तक उनके साथ चले। मार्ग में संतों के स्वागत में पुष्पवर्षा और बैंड वादन किया गया।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री को जैन समाज की ओर से ‘मातृ भू-सेवक’ की मानद उपाधि प्रदान कर अलंकृत किया गया।
जैन धर्म के पंच महाव्रत दुनिया को देते हैं महत्वपूर्ण संदेश
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि जैन धर्म जीवन जीने की एक श्रेष्ठ कला है। जैन धर्म के 24 तीर्थंकरों ने मानव जाति को सत्य, अहिंसा और सदाचार का मार्ग दिखाया है। उन्होंने कहा कि जैन धर्म का मूल सिद्धांत ‘अहिंसा परमो धर्म’ केवल एक वाक्य नहीं, बल्कि सम्पूर्ण जीवन का दर्शन है, जो आज के वैश्विक वातावरण में और अधिक प्रासंगिक हो गया है।
उन्होंने कहा कि जैन धर्म के पंच महाव्रत —
अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह
आज की भौतिकवादी दुनिया में संतुलन, संयम और आंतरिक शांति का संदेश देते हैं। जैन धर्म यह सिखाता है कि सच्चा सुख बाहरी वस्तुओं में नहीं, बल्कि आंतरिक संतोष और आत्मशुद्धि में है।
जैन तीर्थों के विकास के लिए सरकार की प्रतिबद्धता
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार जैन तीर्थ क्षेत्रों में श्रद्धालुओं की सुविधाओं के लिए सड़क, पेयजल, स्वच्छता, प्रकाश व्यवस्था और सुरक्षा जैसे विकास कार्यों को प्राथमिकता दे रही है। जैन समाज की आध्यात्मिक परंपराओं का संरक्षण और प्रसार सरकार की महत्वपूर्ण प्राथमिकताओं में शामिल है।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित
दिव्य देशना कार्यक्रम में आचार्य सुंदर सागर जी महाराज, आचार्य शंशाक जी महाराज, सहकारिता राज्यमंत्री गौतम कुमार दक, जयपुर ग्रेटर उप महापौर पुनीत कर्णावत सहित बड़ी संख्या में संत, समाजजन और श्रद्धालु उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर आचार्य सुंदर सागर जी महाराज के प्रवचन का श्रवण भी किया।