आखिरकार दबोचा गया – 15 साल से फरार खूंखार अपराधी गिरफ्तार
23 अगस्त | संपादन: गणेश शर्मा ,टेलीग्राफ टाइम्स
जयपुर, 22 अगस्त को राजस्थान पुलिस की एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स (AGTF) ने ऐतिहासिक सफलता हासिल करते हुए भरतपुर के कामां में जिला जज के परिवार पर हुए जघन्य हमले के मुख्य आरोपी प्रवीण उर्फ लाला को गाजियाबाद से गिरफ्तार कर लिया। यह अपराधी पिछले 15 वर्षों से फरार था और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने उस पर 5 लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा था।
क्या था मामला
29 जुलाई 2010 को भरतपुर जिले के कामां में तत्कालीन जिला एवं सत्र न्यायाधीश रामेश्वर दयाल रोहिल्ला के परिवार पर पुरानी रंजिश के चलते हमला किया गया था। परसराम, डालचंद, प्रवीण उर्फ लाला और बबलू ने फायरिंग कर जज के पिता खेमचंद रोहिल्ला और भाई गिर्राज प्रसाद की हत्या कर दी थी। इस हमले में एडवोकेट राजेंद्र प्रसाद रोहिल्ला, प्रमिला और अंजू भी घायल हो गए थे। इस वारदात का मुख्य आरोपी प्रवीण उर्फ लाला घटना के बाद से ही फरार हो गया था।
जांच और इनाम
राजस्थान पुलिस ने प्रारंभ में उस पर 25,000 रुपये का इनाम घोषित किया, लेकिन गिरफ्तारी न होने पर मार्च 2011 में उच्च न्यायालय ने जांच सीबीआई को सौंप दी। सीबीआई ने इस हत्याकांड में परसराम, प्रवीण उर्फ लाला, डालचंद और पदम सिंह को दोषी माना था। दो वर्ष बाद पदम सिंह और डालचंद को गिरफ्तार कर लिया गया, जबकि प्रवीण और परसराम दोनों पर 5-5 लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया। ये दोनों पिछले 15 साल से फरार थे।
कैसे पकड़ा गया अपराधी
एजीटीएफ ने इस फरार अपराधी को पकड़ने को प्राथमिकता दी। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सिद्धांत शर्मा के नेतृत्व और राजेश मलिक की देखरेख में एक विशेष टीम बनाई गई। टीम में हेड कांस्टेबल महेंद्र कुमार बिजारणियां, राम अवतार और अभिमन्यु कुमार सिंह ने डेढ़ साल तक लगातार प्रयास किए।
19 अगस्त 2025 को मुखबिर से सटीक सूचना मिलने के बाद टीम दिल्ली और गाजियाबाद के सीमावर्ती क्षेत्रों में रवाना हुई। सैकड़ों तंग गलियों और लाखों की आबादी के बीच टीम ने लगभग 20 किलोमीटर रोजाना घूमकर आरोपी की पहचान की और उसके ठिकाने का पता लगाया।
अंततः 22 अगस्त की सुबह 4 बजे एजीटीएफ ने स्थानीय पुलिस की मदद से गाजियाबाद में छापा मारकर प्रवीण को गिरफ्तार कर लिया। वह फर्जी नाम और दस्तावेजों के सहारे अपनी पहचान छिपाकर रह रहा था।
टीम की भूमिका
इस बड़ी सफलता में हेड कांस्टेबल महेंद्र कुमार, राम अवतार और अभिमन्यु कुमार सिंह की विशेष भूमिका रही। पुलिस निरीक्षक सुभाष सिंह तंवर, हेड कांस्टेबल राधा मोहन, कमल सिंह और कांस्टेबल रविंद्र सिंह का भी अहम योगदान रहा।
15 साल से फरार इस अपराधी की गिरफ्तारी से पुलिस को एक बड़े और संवेदनशील मामले में ऐतिहासिक सफलता मिली है।