आईआईटी भुवनेश्वर में बनेगा ‘नमो सेमीकंडक्टर लैब’ — भारत की सेमीकंडक्टर क्रांति की दिशा में बड़ा कदम
भुवनेश्वर, 06 अक्टूबर 2025।
आसिम अमिताव बिस्वाल
भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर विनिर्माण शक्ति बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने आईआईटी भुवनेश्वर में ‘नमो सेमीकंडक्टर लैब’ (NaMo Semiconductor Laboratory) की स्थापना को मंजूरी दे दी है। यह परियोजना 4.95 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित की जाएगी और इसका वित्तपोषण सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना (MPLAD Scheme) के अंतर्गत किया जा रहा है।
भारत को ‘चिप निर्माता राष्ट्र’ बनाने की दिशा में पहल
केंद्रीय मंत्री वैष्णव ने कहा कि यह प्रयोगशाला भारत के युवाओं को सेमीकंडक्टर डिजाइन और मैन्युफैक्चरिंग की अत्याधुनिक तकनीकों से प्रशिक्षित करेगी। उन्होंने बताया कि भारत अब केवल ‘चिप उपभोक्ता’ नहीं रहेगा, बल्कि आने वाले वर्षों में ‘चिप उत्पादक’ देश के रूप में उभरेगा।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘मेक इन इंडिया’ विजन के अनुरूप यह कदम देश को सेमीकंडक्टर आत्मनिर्भरता की दिशा में सशक्त बनाएगा।
युवाओं को मिलेगा अत्याधुनिक प्रशिक्षण
आईआईटी भुवनेश्वर में बनने वाली यह अत्याधुनिक लैब छात्रों, शोधकर्ताओं और उद्योग से जुड़े तकनीकी विशेषज्ञों को व्यावहारिक कौशल (Industry-ready skills) प्रदान करेगी।
इसमें चिप डिजाइन, फेब्रिकेशन, टेस्टिंग और नैनो-टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों पर विशेष फोकस रहेगा।
परियोजना से लगभग 500 से अधिक छात्रों को प्रतिवर्ष प्रशिक्षण मिलने की उम्मीद है।
शिक्षा और उद्योग के बीच सेतु बनेगा यह प्रोजेक्ट
आईआईटी भुवनेश्वर प्रशासन ने बताया कि यह पहल न केवल शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देगी, बल्कि शैक्षणिक संस्थानों और उद्योग जगत के बीच सहयोग का एक नया मॉडल स्थापित करेगी।
इस प्रयोगशाला के माध्यम से भारत में सेमीकंडक्टर स्टार्टअप इकोसिस्टम को भी बल मिलेगा।
वैश्विक सेमीकंडक्टर बाजार में भारत की स्थिति होगी मजबूत
विशेषज्ञों का मानना है कि ‘नमो सेमीकंडक्टर लैब’ की स्थापना से भारत की स्थिति वैश्विक सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला में मजबूत होगी।
यह पहल देश में चल रहे ‘इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन’ (ISM) को और गति देगी तथा आने वाले वर्षों में “सिलिकॉन वैली ऑफ ईस्ट” के रूप में पूर्वी भारत की पहचान को सुदृढ़ करेगी।
संक्षेप में, आईआईटी भुवनेश्वर में ‘नमो सेमीकंडक्टर लैब’ की स्थापना न केवल तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में एक ठोस कदम है, बल्कि यह भारत के युवाओं को भविष्य की तकनीकी क्रांति का अगुवा बनने का अवसर भी प्रदान करेगी।