जोधपुर, 16 जुलाई 2026 /नरेश गुनानी/ भविष्य की स्वच्छ ऊर्जा और ऊर्जा भंडारण (Energy Storage) के क्षेत्र में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) जोधपुर के वैज्ञानिकों ने एक क्रांतिकारी कदम बढ़ाया है। संस्थान के शोधकर्ता ऐसे अत्याधुनिक ‘स्मार्ट मैटेरियल’ विकसित कर रहे हैं, जो न केवल सूरज की रोशनी से ऊर्जा संजोएंगे, बल्कि उसे लंबे समय तक सुरक्षित रखकर जरूरत पड़ने पर गर्मी (Heat) के रूप में रिलीज भी कर सकेंगे।
यह शोध आईआईटी जोधपुर के रसायन विज्ञान विभाग की सहायक प्रोफेसर मोनिका गुप्ता के नेतृत्व में किया जा रहा है। इस तकनीक के सफल होने पर सोलर पैनलों पर निर्भरता कम होगी और यह तकनीक स्मार्ट विंडो, पहनने योग्य उपकरणों (Wearable Devices) और स्वच्छ ऊर्जा तकनीकों में बड़ा बदलाव ला सकती है।
वर्तमान तकनीक की कमियों को दूर करेगा यह शोध
मौजूदा समय में सौर ऊर्जा को संग्रहित करने वाले अधिकांश मैटेरियल केवल पराबैंगनी (UV) किरणों पर ही काम करते हैं। चूंकि सूर्य के प्रकाश का सबसे बड़ा हिस्सा दृश्य प्रकाश (Visible Light) होता है, इसलिए वर्तमान मैटेरियल्स का वास्तविक जीवन में उपयोग बेहद सीमित रह जाता है। आईआईटी जोधपुर की फंक्शनल ऑर्गेनिक मैटेरियल्स प्रयोगशाला में वैज्ञानिक ऐसे विशेष ऑर्गेनिक मैटेरियल तैयार कर रहे हैं, जो सीधे दृश्य प्रकाश में काम कर सकें। इससे इनकी उपयोगिता और दक्षता कई गुना बढ़ जाएगी।
’मॉलिक्यूलर फोटोस्विच’ और लिक्विड क्रिस्टल का अनोखा संगम
इस शोध की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक दृश्य प्रकाश से संचालित होने वाले Molecular Photoswitches का विकास है। ये बेहद सूक्ष्म अणु होते हैं, जो रोशनी के संपर्क में आने पर अपनी संरचना बदल लेते हैं। शोधकर्ता इन मॉलिक्यूल्स को लिक्विड क्रिस्टल मैटेरियल्स के साथ जोड़ रहे हैं। सूर्य की रोशनी पड़ने पर ये मैटेरियल अपने प्रकाशीय (Optical) और यांत्रिक (Mechanical) गुणों को बदल लेते हैं।
भविष्य में कहाँ होगा इसका उपयोग:
- स्मार्ट विंडो: जो धूप के अनुसार खुद को अनुकूल कर लेंगी।
- उन्नत फोटोनिक सिस्टम और प्रकाश से संचालित मशीनें।
- स्मार्ट कोटिंग और नई पीढ़ी के ऊर्जा उपकरण।
MOST तकनीक: रात में भी मिलेगी सूरज की गर्मी
शोध का एक और सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मॉलिक्यूलर सोलर थर्मल फ्यूल्स (MOST) तकनीक पर आधारित है। इस तकनीक के तहत सूर्य की ऊर्जा को सीधे इस्तेमाल करने के बजाय उसे रासायनिक ऊर्जा के रूप में महीनों या दिनों तक सुरक्षित रखा जा सकता है। बाद में जब भी जरूरत हो, इस ऊर्जा को नियंत्रित तरीके से गर्मी के रूप में वापस प्राप्त किया जा सकता है।
वैज्ञानिक इस तकनीक को इस तरह विकसित कर रहे हैं कि यह अत्यधिक ठंडे वातावरण (जैसे लद्दाख या सियाचिन जैसे क्षेत्रों) में भी प्रभावी ढंग से काम कर सके। इससे सूर्य की रोशनी उपलब्ध न होने पर भी (जैसे रात के समय या बादलों के दिनों में) पहले से संग्रहित ऊर्जा का उपयोग किया जा सकेगा।
वास्तविक परिस्थितियों में सौर ऊर्जा का प्रभावी उपयोग: मोनिका गुप्ता
शोध के महत्व को साझा करते हुए रसायन विज्ञान विभाग की सहायक प्रोफेसर मोनिका गुप्ता ने कहा:
”प्रकृति हमें हर दिन भरपूर सूर्य प्रकाश देती है, लेकिन आज उपलब्ध अधिकांश मैटेरियल उसका पूरा उपयोग नहीं कर पाते क्योंकि वे केवल UV प्रकाश पर निर्भर हैं। हमारा प्रयास ऐसे स्मार्ट मैटेरियल विकसित करना है, जो सीधे दृश्य प्रकाश में काम करें और वास्तविक परिस्थितियों में सौर ऊर्जा को प्रभावी ढंग से संग्रहित एवं उपयोग कर सकें। भविष्य में यह तकनीक स्वच्छ ऊर्जा, स्मार्ट उपकरणों और ऊर्जा सुरक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।”
यह शोध वैश्विक ऊर्जा संकट और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के समाधान की दिशा में आईआईटी जोधपुर की वैज्ञानिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है। प्राकृतिक सूर्य प्रकाश का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करने वाले ये स्मार्ट मैटेरियल भारत के स्वच्छ ऊर्जा आधारित भविष्य को एक नई दिशा देंगे।