जोधपुर/ नरेश गुनानी/आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का दायरा अब केवल सवालों के त्वरित जवाब देने या डेटा जुटाने तक सीमित नहीं रहेगा। वास्तविक दुनिया की जटिल चुनौतियों को हल करने के लिए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) जोधपुर के शोधकर्ता ऐसे अत्याधुनिक ‘स्मार्ट AI असिस्टेंट’ विकसित कर रहे हैं, जो तस्वीरें, दस्तावेज, आवाज, सेंसर डेटा और रिपोर्ट्स को एक साथ समझकर निर्णय लेने में मदद करेंगे।
यह महत्वपूर्ण शोध संस्थान की मशीन इंटेलिजेंस लैब में कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. दिव्या सक्सेना के नेतृत्व में संचालित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य मल्टीमॉडल लर्निंग, एफिशिएंट एआई (Efficient AI) और एआई एजेंट्स के समन्वय से तकनीक को अधिक व्यावहारिक, तेज और कम खर्चीला बनाना है।
तीन प्रमुख तकनीकी स्तंभों पर केंद्रित शोध
- मल्टीमॉडल लर्निंग (Multimodal Learning): तस्वीरों, टेक्स्ट, आवाज और सेंसर डेटा जैसी विविध जानकारियों को एक एकीकृत सिस्टम में समझने और प्रोसेस करने की क्षमता।
- एफिशिएंट एआई (Efficient AI): बड़े एआई मॉडल्स को सीमित कंप्यूटिंग संसाधनों और कम इंटरनेट कनेक्टिविटी में भी तेजी से काम करने योग्य बनाना।
- एआई एजेंट्स (AI Agents): ऐसे स्वायत्त सिस्टम तैयार करना जो केवल निर्देश मिलने पर प्रतिक्रिया न दें, बल्कि संदर्भ और उपलब्ध टूल्स का उपयोग करके जटिल कार्यों को खुद पूरा करा सकें।
प्रमुख क्षेत्रों में क्रांतिकारी प्रभाव
- स्वास्थ्य क्षेत्र: विशेषज्ञ रेडियोलॉजिस्ट्स की कमी को देखते हुए यह सिस्टम मेडिकल इमेज (एक्स-रे, सीटी स्कैन), पैथोलॉजी रिपोर्ट्स और मरीज के इतिहास का एकीकृत विश्लेषण कर डॉक्टरों को सटीक निदान में मदद करेगा।
- शिक्षा क्षेत्र: यूडीआईएसई+ (UDISE+) 2024-25 के अनुसार देश के 14.71 लाख स्कूलों के 24.69 करोड़ विद्यार्थियों और एआईएसएचई (AISHE) के अंतर्गत उच्च शिक्षा के 4.46 करोड़ विद्यार्थियों के लिए यह तकनीक व्यक्तिगत शिक्षण (Personalized Learning) और शोध-अध्ययन में सहायक बनेगी।
- औद्योगिक व विनिर्माण क्षेत्र: वर्ष 2025-26 में ₹47.47 लाख करोड़ के वास्तविक जीवीए (GVA) वाले विशाल विनिर्माण तंत्र में यह एआई सिस्टम मशीनों के सेंसर डेटा, लॉग्स और तस्वीरों की मदद से खराबी आने से पहले ही चेतावनी (Predictive Maintenance) देने और गुणवत्ता सुधारने में कारगर होगा।
स्थानीय संसाधनों और ग्रामीण क्षेत्रों के अनुकूल तकनीक
पारंपरिक बड़े एआई मॉडल्स के संचालन के लिए महंगे सर्वर और निरंतर हाई-स्पीड इंटरनेट की दरकार होती है। आईआईटी जोधपुर के इस शोध की सबसे बड़ी खूबी इसका ‘कम संसाधन उपयोग’ मॉडल है। इसे ऐसे डिजाइन किया जा रहा है कि इसे किसी ग्रामीण अस्पताल, स्थानीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र या दूरदराज की फैक्ट्री में भी आसानी से स्थानीय स्तर पर चलाया जा सके।
शोध के विजन पर बात करते हुए डॉ. दिव्या सक्सेना ने स्पष्ट किया कि एआई का भविष्य केवल विशालकाय मॉडल बनाने में नहीं, बल्कि तकनीक को किफायती, सुरक्षित, स्केलेबल और वास्तविक परिस्थितियों के अनुकूल बनाने में है। यह शोध एआई को केवल एक इंफॉर्मेशन टूल से आगे बढ़ाकर इंसानों और संस्थानों के लिए एक सक्रिय, वास्तविक कार्य-सहायक प्रणाली के रूप में स्थापित करेगा।