असम में ‘हैट्रिक’ के बाद नई सरकार की सुगबुगाहट: जेपी नड्डा और नायब सैनी तय करेंगे मुख्यमंत्री का नाम

गौरव कोचर 

गुवाहाटी/नई दिल्ली: असम विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की प्रचंड जीत के बाद अब राज्य के अगले मुख्यमंत्री को लेकर हलचल तेज हो गई है। 126 सदस्यीय विधानसभा में 82 सीटें जीतकर भाजपा ने राज्य में सत्ता की ‘हैट्रिक’ लगाई है। इस बड़ी जीत के बाद अब सबकी नजरें गुवाहाटी में होने वाली विधायक दल की बैठक पर टिकी हैं।

केंद्रीय पर्यवेक्षकों की नियुक्ति

​भाजपा आलाकमान ने असम में नए नेता के चयन की प्रक्रिया को सुचारू बनाने के लिए कद्दावर नेताओं को जिम्मेदारी सौंपी है:

  • जेपी नड्डा (केंद्रीय पर्यवेक्षक): भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और वर्तमान केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा को मुख्य पर्यवेक्षक नियुक्त किया गया है। उनका अनुभव गुवाहाटी में विधायकों की राय जानने और सर्वसम्मति बनाने में महत्वपूर्ण होगा।
  • नायब सिंह सैनी (सह-पर्यवेक्षक): हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को सह-पर्यवेक्षक बनाया गया है। वह नड्डा के साथ समन्वय करेंगे और विधायक दल की बैठक की निगरानी करेंगे।

विधायक दल की बैठक और मुख्यमंत्री का चयन

​सूत्रों के अनुसार, अगले एक-दो दिनों में गुवाहाटी में नवनिर्वाचित विधायकों की महत्वपूर्ण बैठक होगी। इस बैठक में केंद्रीय पर्यवेक्षक व्यक्तिगत रूप से विधायकों से चर्चा करेंगे। हालांकि भाजपा ने यह चुनाव सामूहिक नेतृत्व और विकास के नाम पर लड़ा था, लेकिन अब विधायक दल की मुहर के बाद आधिकारिक रूप से मुख्यमंत्री के नाम की घोषणा की जाएगी।

असम का चुनावी जनादेश: एक नजर में

​असम की जनता ने विकास और स्थिरता को चुनते हुए विपक्षी खेमे को पूरी तरह से किनारे कर दिया है।

पार्टी

सीटें जीतीं

प्रदर्शन

बीजेपी (BJP)

82

स्पष्ट बहुमत, लगातार तीसरी जीत

कांग्रेस (INC)

19

करारी हार, दहाई के अंक में सिमटी

अन्य/गठबंधन

25

क्षेत्रीय दलों का मिला-जुला असर

कांग्रेस की करारी हार

​जहां भाजपा ने 82 सीटें जीतकर अपना दबदबा कायम रखा, वहीं मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस को इस बार बड़ा झटका लगा है। कांग्रेस मात्र 19 सीटों पर सिमट गई है, जो पार्टी के लिए राज्य में गहरे आत्ममंथन का विषय है।

तीसरी बार ‘केसरिया’ असम

​यह जीत भाजपा के लिए रणनीतिक रूप से बेहद अहम है क्योंकि उत्तर-पूर्व के सबसे बड़े राज्य में लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी करना पार्टी की नीतियों और स्थानीय नेतृत्व की स्वीकार्यता को दर्शाता है। अब देखना यह होगा कि दिल्ली से भेजे गए पर्यवेक्षक किस चेहरे पर दांव लगाते हैं—क्या वर्तमान नेतृत्व को ही दोहराया जाएगा या किसी नए चेहरे को कमान सौंपी जाएगी।

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