अष्ट भू बैकुंठ आश्रम में भगवान रणछोड़ राय के अन्नकूट महोत्सव की धूम
छप्पन भोग की झांकी सजाई गई, जगद्गुरु स्वामी रामानन्दाचार्य ने की महाआरती
(हरिप्रसाद शर्मा)
पुष्कर (अजमेर)। धार्मिक नगरी पुष्कर में सोमवार को अष्ट भू बैकुंठ आश्रम स्थित सुप्रसिद्ध भगवान रणछोड़ राय मंदिर में अन्नकूट महोत्सव बड़े श्रद्धा और भक्ति भाव से मनाया गया। मंदिर में भव्य सजावट के साथ भगवान रणछोड़ राय को छप्पन भोग का अन्नकूट भोग लगाया गया। भक्तों की भीड़ और वातावरण में गूंजते भजनों ने संपूर्ण परिसर को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।
छप्पन भोग की झांकी ने मोहा भक्तों का मन
मंदिर परिसर को रंगीन फूलों, रोशनी और धार्मिक पताकाओं से सजाया गया था। भगवान रणछोड़ राय को 56 प्रकार के व्यंजनों — मिठाइयों, फल, सूखे मेवों, पूड़ी, कचौरी, हलवा, दाल-बाटी-चूरमा सहित विविध पारंपरिक प्रसाद — से सुसज्जित अन्नकूट का भोग अर्पित किया गया।
भगवान के दिव्य स्वरूप और छप्पन भोग की झांकी के दर्शन के लिए सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं। जैसे ही मंदिर में महाआरती प्रारंभ हुई, “जय रणछोड़ राय की” के जयकारों से पूरा परिसर गूंज उठा।
जगद्गुरु स्वामी रामानन्दाचार्य ने की महाआरती, वेंकटेश् प्रपन्नाचार्य ने दिया संदेश
कार्यक्रम में जगद्गुरु स्वामी रामानन्दाचार्य जी महाराज ने भगवान रणछोड़ राय की महाआरती कर अन्नकूट भोग लगाया।
इस अवसर पर जगद्गुरु स्वामी वेंकटेश् प्रपन्नाचार्य ने कहा—
“भगवान को अर्पित किया गया भोग केवल भोजन नहीं, बल्कि भक्ति का प्रतीक है। भगवान का कण मात्र प्रसाद भी जीवन का उद्धार करने वाला होता है।”
आचार्य ने श्रद्धालुओं को संदेश दिया कि अन्नकूट का पर्व हमें समर्पण, सेवा और कृतज्ञता की भावना सिखाता है। उन्होंने सभी से आग्रह किया कि इस पर्व को समाज में प्रेम और एकता के रूप में मनाएं।
सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन
अन्नकूट महोत्सव के साथ ही आश्रम परिसर में संगीतमय सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन भी आरंभ हुआ। कथा के यजमान वीरेंद्र दुबे (बिहार) हैं। कथा वाचक के मधुर स्वर और भक्ति संगीत से पूरा वातावरण भक्तिमय बना हुआ है।
कथा श्रवण के लिए प्रतिदिन सैकड़ों श्रद्धालु पुष्कर और आसपास के इलाकों से पहुंच रहे हैं। कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण के बाल लीलाओं, गोवर्धन पूजन और भक्तों के उद्धार की कथाएं सुनाई जा रही हैं, जिन पर श्रद्धालु “हरि बोल” और “राधे-श्याम” के जयकारों से गूंज उठा रहे हैं।
भव्य सजावट और प्रसाद वितरण
मंदिर के पुजारी विशाल दुबे ने बताया कि अन्नकूट पर्व पर मंदिर की विशेष सजावट की गई थी। दीपों और पुष्पमालाओं से संपूर्ण परिसर आलोकित था। अन्नकूट भोग के बाद सभी श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरण किया गया।
उन्होंने बताया कि इस आयोजन का उद्देश्य भक्तों में भक्ति भावना जागृत करना और भगवान रणछोड़ राय की सेवा-भावना को जन-जन तक पहुंचाना है।
भक्तिमय वातावरण में डूबा पुष्कर
अन्नकूट महोत्सव के अवसर पर अष्ट भू बैकुंठ आश्रम में दिनभर भजन, कीर्तन और आरती की ध्वनियां गूंजती रहीं। भक्तों ने भगवान के दर्शन कर अपने जीवन को धन्य माना।
पुष्कर की पावन धरती पर यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक समरसता का भी सुंदर उदाहरण प्रस्तुत किया।
📿 प्रमुख आकर्षण:
- छप्पन भोग की भव्य झांकी
- महाआरती एवं प्रसाद वितरण
- सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा
- पुष्प एवं दीप सजावट से सजा मंदिर परिसर