झारखंड के शिक्षकों को अन्य राज्यकर्मियों की तर्ज पर मिले MACP का लाभ
- मांगें पूरी न होने पर ‘पाने अपना अधिकार, चलो मुख्यमंत्री के द्वार’ का दिया आह्वान; CM आवास घेरने की दी चेतावनी
रांची / नेहा रंजन/झारखंड अधिकारी, शिक्षक एवं कर्मचारी महासंघ (JHAROTEF) ने स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग द्वारा जारी पत्रांक-218 (विधि) दिनांक 24 जुलाई 2026 पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। महासंघ का स्पष्ट कहना है कि विभाग अव्यवहारिक संकल्पों और तकनीकी व्याख्याओं की आड़ लेकर शिक्षकों को Modified Assured Career Progression (MACP) के न्यायोचित लाभ से वंचित कर रहा है, जिसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।
नियमित सरकारी सेवक हैं शिक्षक, समानता का अधिकार अनिवार्य
महासंघ के अनुसार, राज्य के शिक्षक भी अन्य सरकारी कर्मचारियों की भांति नियमित राज्य सेवक हैं। इस नाते उन्हें MACP का वित्तीय लाभ मिलना उनका संवैधानिक व कानूनी अधिकार है। विभाग द्वारा पुराने संकल्पों का हवाला देकर शिक्षकों के हक को मारना न केवल अन्यायपूर्ण है, बल्कि यह समानता के संवैधानिक सिद्धांतों का भी खुला उल्लंघन है।
न्यायालय के आदेशों और भावना की अनदेखी का आरोप
प्रांतीय अध्यक्ष विक्रान्त कुमार सिंह ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा:
”माननीय उच्च न्यायालय ने समय-समय पर शिक्षकों के हित में महत्वपूर्ण फैसले सुनाए हैं। इसके बावजूद शिक्षा विभाग शिक्षकों की वास्तविक सेवा परिस्थितियों और अदालत की मंशा को दरकिनार कर रहा है। विभाग का यह प्रयास अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। राज्य सरकार को अविलंब इस निर्णय पर पुनर्विचार कर शिक्षकों को अन्य कर्मियों के समान MACP का लाभ देना चाहिए। यह केवल शिक्षकों के कल्याण का नहीं, बल्कि सेवा में न्याय और समानता की रक्षा का विषय है।”
चरणबद्ध आंदोलन की चेतावनी: ‘चलो मुख्यमंत्री के द्वार’
प्रांतीय महासचिव उज्ज्वल कुमार तिवारी ने विभागीय आदेश पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि संगठन अपनी मांगों को लेकर पहले से ही आंदोलनरत है। विभाग का यह दमनकारी आदेश शिक्षकों के संघर्ष को और धार देगा।
महासंघ ने अपनी मुख्य लंबित मांगों को रेखांकित किया:
- MACP का लाभ लागू करना
- शिशु शिक्षण भत्ता प्रदान करना
- सेवा निवृत्ति की आयु 62 वर्ष करना
- परिवहन भत्ता लागू करना
महासंघ ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि राज्य सरकार ने इन मांगों पर शीघ्र सकारात्मक फैसला नहीं लिया, तो राज्यभर के हजारों शिक्षक, कर्मचारी और अधिकारी सड़कों पर उतरेंगे। संगठन अपने पूर्व निर्धारित कार्यक्रम “पाने अपना अधिकार, चलो मुख्यमंत्री के द्वार” के तहत मुख्यमंत्री आवास तक विशाल पदयात्रा और घेराव करेगा, जिसकी संपूर्ण जवाबदेही राज्य सरकार की होगी।