अवैध बजरी वाहनों की बेलगाम आवाजाही के खिलाफ अजमेर में जोरदार प्रदर्शन, प्रशासन को सौंपा गया ज्ञापन
अजमेर, 24 अगस्त। रिपोर्ट हरि प्रसाद शर्मा। संपादन गौरव कोचर। टेलीग्राफ टाइम्स
राजस्थान बोर्ड की टॉपर संध्या की हाल ही में डंपर से हुई दर्दनाक मौत के बाद अजमेर शहरवासियों का आक्रोश फूट पड़ा। रविवार को वरुण सागर मार्ग और आसपास के क्षेत्रों में अवैध बजरी डंपरों और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की बेलगाम आवाजाही के खिलाफ नागरिकों ने जोरदार विरोध-प्रदर्शन किया।
टेलीफोन एक्सचेंज चौराहे पर हुए इस आंदोलन का नेतृत्व राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) नेता आशीष सोनी ने किया। बड़ी संख्या में एकत्रित हुए लोगों ने हाथों में तख्तियां लेकर प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की और अवैध वाहनों पर तत्काल रोक लगाने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान लोगों ने सड़क पर लाइन से खड़े होकर मार्ग को आंशिक रूप से बाधित किया, जिससे यातायात कुछ समय के लिए प्रभावित रहा और राहगीरों को परेशानियों का सामना करना पड़ा।
सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस जाप्ता मौके पर पहुंचा और स्थिति को नियंत्रण में लिया। दरगाह डिप्टी लक्ष्मण चौधरी भी मौके पर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों से शांतिपूर्वक बातचीत की। उन्होंने आंदोलनकारियों से कानून-व्यवस्था बनाए रखने और मार्ग को पूरी तरह बाधित न करने की अपील की। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कानून का उल्लंघन हुआ तो संबंधित व्यक्तियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई होगी। पुलिस की इस सख्ती पर आरएलपी नेता आशीष सोनी ने नाराजगी जताई, लेकिन आपसी समझाइश के बाद आंदोलन को समाप्त कर दिया गया।
प्रदर्शन के बाद नागरिकों ने अतिरिक्त जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। इसमें कहा गया कि पिछले कुछ महीनों में अवैध डंपरों और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के कारण क्षेत्र में कई जानलेवा हादसे हो चुके हैं। संध्या की मौत ने लोगों के आक्रोश को और बढ़ा दिया है। ज्ञापन में मांग की गई कि इन अवैध वाहनों की आवाजाही पर तुरंत रोक लगाई जाए।
आरएलपी नेता आशीष सोनी ने कहा कि संध्या के परिवार को सरकार की ओर से 50 लाख रुपये का मुआवजा और एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जानी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने शीघ्र कार्रवाई नहीं की तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
स्थानीय नागरिकों ने स्पष्ट कहा कि वे अपने क्षेत्र को हादसों से मुक्त देखना चाहते हैं और इसके लिए हर स्तर पर संघर्ष करेंगे। प्रदर्शन भले ही शांति पूर्ण तरीके से समाप्त हो गया हो, लेकिन इसने प्रशासन के सामने बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—क्या आम नागरिकों की जान की कीमत पर अवैध बजरी परिवहन को यूं ही चलता रहने दिया जाएगा?