अलवर: वन राज्य मंत्री संजय शर्मा ने शहरी समस्या समाधान शिविरों का किया निरीक्षण, लाभार्थियों को सौंपे पट्टे
| नरेश गुनानी
जयपुर/अलवर, 20 दिसम्बर। राजस्थान सरकार के दो सफल वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित ‘शहरी समस्या समाधान शिविर’ के तहत शनिवार को वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संजय शर्मा ने अलवर नगर विकास न्यास (UIT) एवं नगर निगम कार्यालय का दौरा किया। उन्होंने शिविरों की कार्यप्रणाली का अवलोकन करते हुए आमजन से संवाद किया और विभिन्न योजनाओं के पात्र लाभार्थियों को पट्टे एवं प्रमाण पत्र वितरित किए।
समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण पर जोर
वन राज्य मंत्री ने शिविर में लगाई गई विभिन्न विभागों की स्टॉलों का गहन निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि शिविर में आने वाले हर प्रकरण और पुराने लंबित मामलों का निस्तारण नियमानुसार शिविर अवधि के दौरान ही सुनिश्चित किया जाए।
संजय शर्मा ने कहा, “मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में चल रहे ये अभियान समाज के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति को लाभ पहुँचाने के लिए हैं। ये शिविर न केवल सरकारी सेवाओं को सुलभ बना रहे हैं, बल्कि प्रशासन की पारदर्शिता और नागरिकों के विश्वास को भी मजबूत कर रहे हैं।”
अंतिम पंक्ति तक पहुँचे योजनाओं का लाभ
मंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि अभियान के तहत दी जा रही विशेष छूटों और सुविधाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए ताकि अधिक से अधिक शहरवासी जागरूक होकर इनका लाभ उठा सकें। उन्होंने जोर दिया कि किसी भी फरियादी को अपने काम के लिए बार-बार कार्यालय के चक्कर न लगाने पड़ें और उनके आवेदनों का निस्तारण गुणवत्ता के साथ किया जाए।
स्वच्छता और प्लास्टिक मुक्त अलवर का आह्वान
शिविर के दौरान नागरिकों को संबोधित करते हुए संजय शर्मा ने आगामी स्वच्छता सर्वेक्षण का जिक्र किया। उन्होंने अलवर वासियों से अपील की कि:
- शहर को प्लास्टिक मुक्त बनाने में अपना योगदान दें।
- अपने आसपास के क्षेत्र को साफ-सुथरा रखें।
- अलवर को स्वच्छता रैंकिंग में शीर्ष पर लाने के लिए नगर निगम का पूर्ण सहयोग करें।
परिवेदनाओं का मौके पर निस्तारण
अवलोकन के दौरान मंत्री ने उपस्थित फरियादियों की समस्याओं को स्वयं सुना और मौके पर मौजूद अधिकारियों को उनके त्वरित निराकरण के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि समस्या समाधान के बाद संबंधित व्यक्ति को उसकी सूचना अनिवार्य रूप से दी जाए ताकि जनसुनवाई की सार्थकता सिद्ध हो सके।

