अलवर पुलिस का बड़ा खुलासा : बैंककर्मियों की मिलीभगत से 500 करोड़ का साइबर घोटाला उजागर, 6 और आरोपी गिरफ्तार

अलवर पुलिस का बड़ा खुलासा : बैंककर्मियों की मिलीभगत से 500 करोड़ का साइबर घोटाला उजागर, 6 और आरोपी गिरफ्तार

गौरव कोचर 

जयपुर/अलवर, 29 सितम्बर।
राजस्थान में चल रहे ऑपरेशन साइबर संग्राम के तहत अलवर पुलिस ने एक और बड़ी सफलता हासिल करते हुए बैंककर्मियों की मिलीभगत से चल रहे 500 करोड़ रुपये के साइबर घोटाले का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने इस संगठित गिरोह के मास्टरमाइंड सहित 6 और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई के बाद मामले में अब तक गिरफ्तार आरोपियों की संख्या 16 हो गई है।

500 करोड़ से ज्यादा का संदिग्ध लेन-देन

पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि गिरोह ने फर्जी करंट/कॉर्पोरेट खातों (म्यूल अकाउंट्स) के जरिए देशभर में 500 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी को अंजाम दिया। इन खातों से जुड़े लेन-देन पर अकेले एनसीआरपी पोर्टल पर 4,000 से ज्यादा शिकायतें दर्ज पाई गई हैं। गिरोह ऊंचे कमीशन पर साइबर ठगों को बैंक खाते उपलब्ध कराता था, जिससे ठगी की रकम को आसानी से घुमाया जा सके।

गिरफ्तार आरोपी और उनकी भूमिका

नवीनतम कार्रवाई में पुलिस ने मास्टरमाइंड वरुण पटवा (40) निवासी हिरणमगरी उदयपुर हाल गुरुग्राम (हरियाणा) और सतीश कुमार जाट (35) निवासी उकलाना, जिला हिसार (हरियाणा) को गिरफ्तार किया है। इनके साथ एक्सिस बैंक हिसार शाखा में कार्यरत चार बैंककर्मी भी पकड़े गए हैं, जिनमें—

  • साहिल अग्रवाल (33) निवासी नरवाल, जिला जींद – सेल्स मैनेजर
  • गुलशन पंजाबी (33) निवासी नरवाल, जिला जींद – सेल्स मैनेजर
  • आसु शर्मा (23) निवासी खेड़ाचोपड़ा, हिसार – मर्चेंट इंक्वारी बिजनेस (MIB)
  • आंचल जाट (24) निवासी उकलाना, हिसार – सेल्स ऑफिसर

इन बैंक कर्मचारियों पर ग्राहकों को कमीशन देकर फर्जी फर्मों के नाम पर खाते खुलवाने और उन्हें साइबर अपराधियों तक पहुँचाने का आरोप है।

घोटाले का तरीका

पुलिस के अनुसार गिरोह का नेटवर्क बैंककर्मियों, दलालों और मास्टरमाइंड के माध्यम से काम करता था। बैंक कर्मचारी ग्राहकों को पैसे का लालच देकर उनके नाम पर फर्जी करंट अकाउंट्स खुलवाते थे।

  • खातों को बाद में व्हाट्सएप और टेलीग्राम ग्रुप्स के जरिए साइबर ठगों को बेचा जाता था।
  • खाते से जुड़े मोबाइल नंबर को अलग फोन में डालकर, APK फाइल इंस्टॉल कराकर, ठगों को सीधे ओटीपी और इंटरनेट बैंकिंग एक्सेस उपलब्ध कराया जाता था।
  • इन खातों का उपयोग ऑनलाइन बेटिंग, गेमिंग फ्रॉड और क्रिप्टो एक्सचेंजों (जैसे Binance) के माध्यम से बड़ी रकम निकालने में किया जाता था।

बरामदगी और अगली कार्रवाई

पुलिस ने कार्रवाई के दौरान ₹2.51 लाख नकद, लगभग ₹5 लाख की अपराध राशि को 10 खातों में फ्रीज करवाया है। इसके अलावा 26 एटीएम कार्ड, 33 मोबाइल फोन, 34 सिम कार्ड, 12 चेक बुक, 6 बैंक पासबुक, 12 हस्ताक्षरयुक्त चेक, आधार कार्ड, पैन कार्ड, 2 पहचान पत्र, 3 वाहन आरसी, मोहर, रसीद बुक और 2 कारें जब्त की गई हैं।

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मुख्यालय कांबले शरण गोपीनाथ के नेतृत्व में गठित एसआईटी इस रैकेट की गहन जांच कर रही है ताकि नेटवर्क के शेष सदस्यों और सरगनाओं को पकड़ा जा सके। पुलिस का कहना है कि अब तक इस मामले में 10 आरोपियों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है और आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे संभव हैं।

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