अलवर/नरेश गुनानी/राजस्थान में छोटे बच्चों को समय पर बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने और उनके समुचित विकास को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से ‘समग्र शिशु बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम’ शुरू किया जा रहा है। भारत सरकार की इस विशेष पहल के तहत शुरुआती चरण में यह कार्यक्रम राज्य के अलवर और भरतपुर जिलों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू होगा।
प्रमुख शासन सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य गायत्री राठौड़ ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि इस कार्यक्रम का मुख्य केंद्र जन्म से लेकर तीन वर्ष तक के बच्चे होंगे। इस अवधि के दौरान बच्चों की सेहत, पोषण स्तर और समग्र विकास की निरंतर व गहन निगरानी की जाएगी। विशेष रूप से उन बच्चों की पहचान प्राथमिकता से की जाएगी, जिन्हें सामान्य बच्चों की तुलना में अतिरिक्त देखभाल, पोषण अथवा चिकित्सकीय उपचार की आवश्यकता है।
जोखिम वाले बच्चों का घर पर होगा नियमित फॉलोअप
कार्यक्रम के अंतर्गत स्वास्थ्य कार्यकर्ता बच्चों की स्थिति का आकलन कर उन्हें ‘सामान्य’ या ‘जोखिम वाले’ वर्ग में चिन्हित करेंगे। उच्च जोखिम श्रेणी में आने वाले बच्चों का स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं द्वारा घर-घर जाकर नियमित फॉलोअप किया जाएगा। यदि किसी बच्चे की स्थिति में विशेष ध्यान देने की जरूरत होगी, तो उसे तुरंत नजदीकी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र या बड़े अस्पताल में रेफर किया जाएगा। इस पहल का मुख्य उद्देश्य गंभीर बीमारियों की समय रहते पहचान कर उपचार शुरू करना और 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर (U5MR) में प्रभावी कमी लाना है।
‘शैशव ऐप’ से होगी डिजिटल निगरानी और ट्रैकिंग
बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण और रियल-टाइम ट्रैकिंग को सुगम बनाने के लिए आशा कार्यकर्ताओं को ‘शैशव ऐप’ से लैस किया जाएगा। आशा कार्यकर्ता इस डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बच्चों से संबंधित स्वास्थ्य डेटा दर्ज करेंगी, जिससे यह स्पष्ट रूप से पता चल सकेगा कि किस बच्चे को तुरंत चिकित्सकीय हस्तक्षेप की दरकार है। इसके अतिरिक्त, यदि किसी बच्चे को अस्पताल भेजा जाता है, तो अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद भी ऐप के जरिए उसका फॉलोअप सुनिश्चित किया जाएगा। ऐप स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को समय पर अलर्ट और जरूरी सूचनाएं भी उपलब्ध कराएगा।
राष्ट्रीय कार्यशाला में राजस्थान का प्रस्तुतीकरण
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा महाराष्ट्र में आयोजित एक राष्ट्रीय कार्यशाला के दौरान समग्र शिशु बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (SSBSK) की पायलट कार्ययोजना, उसके मूल्यांकन तथा केंद्र, राज्य और सहयोगी संस्थाओं की भूमिका पर विस्तृत मंथन किया गया। इस कार्यशाला में राजस्थान का प्रतिनिधित्व करते हुए बाल स्वास्थ्य परियोजना निदेशक डॉ. प्रदीप चौधरी ने पायलट इम्प्लीमेंटेशन प्लान एवं पार्टनर्स एंगेजमेंट से जुड़ी पैनल चर्चा में भाग लिया और राज्य की कार्ययोजना का प्रभावी प्रस्तुतीकरण दिया।