| प्रीति बलानी
साल 2008 में जब आईपीएल की शुरुआत हुई थी, तब राजस्थान रॉयल्स को सबसे कम कीमत पर खरीदा गया था। लेकिन 19वें सीजन (2026) तक आते-आते इसकी कीमत में जो उछाल आया है, वह किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है।
मुख्य आंकड़े: एक नजर में
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विवरण |
2008 (शुरुआत) |
2026 (वर्तमान डील) |
वृद्धि (लगभग) |
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मालिकाना हक |
इमर्जिंग मीडिया ($67 मिलियन) |
काल सोमानी कंसोर्टियम ($1.63 बिलियन) |
~24 गुना (डॉलर में) |
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भारतीय रुपयों में |
₹268 करोड़ (₹40/$ की दर से) |
₹15,240 – ₹16,290 करोड़ |
हालांकि डॉलर के मुकाबले टीम की वैल्यू लगभग 24-25 गुना बढ़ी है, लेकिन भारतीय मुद्रा (INR) के अवमूल्यन और आईपीएल की बढ़ती ब्रांड वैल्यू के कारण निवेश पर मिलने वाला रिटर्न 36 से 60 गुना के बीच आंका जा रहा है।
💥 2026 की ‘मेगा डील’ जिसने इतिहास रच दिया
मार्च 2026 में केवल कुछ ही घंटों के भीतर आईपीएल के इतिहास की दो सबसे बड़ी डील्स हुईं:
- राजस्थान रॉयल्स (RR): भारतीय मूल के अमेरिकी उद्यमी काल सोमानी के नेतृत्व वाले कंसोर्टियम (जिसमें वॉलमार्ट के पूर्व चेयरमैन रॉब वॉल्टन भी शामिल हैं) ने इसे $1.63 बिलियन (करीब ₹15,300 करोड़) में खरीदा।
- रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB): आरआर की डील के कुछ ही घंटों बाद, आदित्य बिड़ला ग्रुप और ब्लैकस्टोन जैसे दिग्गजों ने आरसीबी को $1.78 बिलियन (करीब ₹16,700 करोड़) में खरीदकर इसे आईपीएल की सबसे महंगी टीम बना दिया।
📈 इस भारी बढ़ोतरी के 3 मुख्य कारण
- मीडिया राइट्स का जादू: बीसीसीआई ने 2023-27 चक्र के लिए मीडिया अधिकार ₹48,390 करोड़ ($6.4 बिलियन) में बेचे थे। इससे हर टीम के हिस्से में आने वाली निश्चित आय (Revenue Sharing) कई गुना बढ़ गई।
- ग्लोबल इन्वेस्टर्स की एंट्री: अब आईपीएल में केवल भारतीय बिजनेसमैन नहीं, बल्कि अमेरिकी प्राइवेट इक्विटी फर्म और ग्लोबल स्पोर्ट्स इन्वेस्टर्स पैसा लगा रहे हैं। वे इसे NBA और NFL की तर्ज पर एक ‘एसेट’ मान रहे हैं।
- अजेय ब्रांड वैल्यू: आरसीबी और आरआर जैसी टीमों ने न केवल मैदान पर (आरसीबी ने 2025 का खिताब जीता), बल्कि सोशल मीडिया और मर्चेंडाइज के जरिए भी अपनी तगड़ी फैन फॉलोइंग बनाई है।
