नई दिल्ली / कोलकाता: गनपत चौहान
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो आज (23 मई, 2026) से अपनी चार दिवसीय भारत की ऐतिहासिक आधिकारिक यात्रा पर पहुंच चुके हैं। बतौर विदेश मंत्री यह उनका पहला भारत दौरा है, जिसे दोनों देशों के रणनीतिक और आर्थिक संबंधों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कोलकाता से हुई शुरुआत, दिल्ली में पीएम मोदी से मुलाकात

मार्को रुबियो शनिवार सुबह सबसे पहले कोलकाता पहुंचे। पिछले 14 वर्षों में किसी शीर्ष अमेरिकी राजनयिक की यह पहली कोलकाता यात्रा है, जो इस बार के दौरे को बेहद खास बनाती है। इसके बाद वे राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली पहुंचे, जहां उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इस उच्च स्तरीय बैठक में व्यापार, एडवांस्ड टेक्नोलॉजी, रक्षा सहयोग और वैश्विक सुरक्षा जैसे कई अहम द्विपक्षीय मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।
भारत को असीमित ऊर्जा आपूर्ति का भरोसा
भारत रवाना होने से पहले वाशिंगटन में दिए अपने एक बयान में रुबियो ने भारत को अमेरिका का एक ‘महान और भरोसेमंद साझेदार’ बताया था। उन्होंने साफ किया कि अमेरिका, भारत की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और वह भारत को अधिक से अधिक तेल और एलपीजी (LPG) की आपूर्ति करने के लिए तैयार है।
जयपुर और आगरा का दौरा, क्वाड बैठक में होंगे शामिल
अमेरिकी विदेश मंत्रालय द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार, मार्को रुबियो का यह दौरा भारत के चार प्रमुख शहरों पर केंद्रित है:
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- 24 मई (रविवार): सुबह 11:30 बजे रुबियो और भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर के बीच द्विपक्षीय बैठक होगी, जिसमें कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद है।
- 24-25 मई: अपने इस व्यस्त कार्यक्रम के बीच अमेरिकी विदेश मंत्री सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व के दो प्रमुख शहरों जयपुर और आगरा की यात्रा भी करेंगे।
- 26 मई (मंगलवार): दौरे के अंतिम दिन वे नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में आयोजित होने वाली क्वाड (QUAD) विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेंगे। भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक में ऑस्ट्रेलिया और जापान के विदेश मंत्री भी शामिल होंगे, जिसके बाद रुबियो अमेरिका के लिए रवाना हो जाएंगे।
लोकतंत्रों का अनूठा संगम: इस यात्रा के दौरान दोनों देश अमेरिका के 250वें स्थापना दिवस को भी संयुक्त रूप से मनाने को लेकर काफी उत्साहित हैं। रुबियो ने अपने बयान में कहा था कि “यह बेहद गौरव का क्षण होगा जब दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र (भारत) और दुनिया का सबसे पुराना लोकतंत्र (अमेरिका) इसे साथ मिलकर मनाएंगे।”