अमेरिका-भारत व्यापार तनाव गहराया: ट्रंप ने रूस से तेल खरीद पर भारत पर 50% शुल्क लगाया, चीन पर फैसला लंबित
गौरव कोचर/ टेलीग्राफ टाइम्स
न्यूयॉर्क/नई दिल्ली:
अमेरिका और भारत के बीच व्यापार तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से तेल खरीदने के चलते भारत पर अतिरिक्त 25% आयात शुल्क लगाने का ऐलान किया है। यह शुल्क पहले से लागू 25% टैरिफ के ऊपर लगाया गया है, जिससे भारत पर कुल आयात शुल्क 50% तक पहुंच गया है। यह अमेरिका द्वारा किसी भी देश पर लगाए गए सबसे ऊंचे शुल्कों में से एक है। नया शुल्क 27 अगस्त से लागू होगा।
उधर, उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस ने फॉक्स न्यूज़ संडे को दिए इंटरव्यू में कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप चीन के खिलाफ भी ऐसे ही कदम पर विचार कर रहे हैं, लेकिन अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। वेंस के अनुसार, “चीन का मामला अधिक जटिल है, क्योंकि अमेरिका-चीन संबंध केवल रूस के मुद्दे तक सीमित नहीं हैं, बल्कि कई अन्य आर्थिक और रणनीतिक पहलुओं से जुड़े हैं।”
भारत की कड़ी प्रतिक्रिया
भारत ने अमेरिकी कदम को “अनुचित, अन्यायपूर्ण और अव्यावहारिक” करार दिया है। विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा, “यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि अमेरिका ने भारत पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने का फैसला किया है। भारत अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगा।”
अमेरिका ने शुरू में भारत पर 25% टैरिफ प्रतिशोधी कार्रवाई के तहत लगाया था। यह कार्रवाई अमेरिकी दावे के आधार पर की गई थी कि भारत रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीद रहा है और इससे रूस को आर्थिक लाभ मिल रहा है, जो यूक्रेन युद्ध के बीच अमेरिकी नीतियों के खिलाफ है। पिछले सप्ताह, ट्रंप प्रशासन ने यह शुल्क दोगुना कर दिया।
चीन पर निगाहें
चीन भी रूस से तेल खरीदता है, लेकिन ट्रंप प्रशासन वहां तुरंत कोई कदम उठाने से बच रहा है। वेंस के मुताबिक, अमेरिका का चीन के साथ व्यापार, टेक्नोलॉजी और सुरक्षा से जुड़ा जटिल संबंध है, इसलिए वहां निर्णय लेने में समय लगेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम अमेरिका-भारत व्यापार संबंधों में तनाव को बढ़ा सकता है और वैश्विक तेल बाजार पर भी असर डाल सकता है। वहीं, चीन पर फैसला लंबित रखना यह दर्शाता है कि अमेरिका की रणनीति केवल आर्थिक नहीं, बल्कि भू-राजनीतिक समीकरणों से भी प्रभावित है।