गौरव कोचर/ईरान और अमेरिका के बीच जारी कूटनीतिक गतिरोध के बीच ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने वाशिंगटन को कड़ा संदेश दिया है। राष्ट्रपति पेजेशकियन ने स्पष्ट किया कि अमेरिका को ईरान के प्रति अपने लहजे और आक्रामक रवैये में बदलाव करना होगा। उन्होंने आगाह किया कि दबाव, प्रतिबंध और धमकियों की नीति से किसी भी समस्या का समाधान नहीं निकलेगा, बल्कि इससे वार्ता प्रक्रिया और अधिक जटिल व दिशाहीन हो जाएगी।
ईरानी राष्ट्रपति कार्यालय द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, राष्ट्रपति पेजेशकियन ने कहा कि यदि अमेरिका वास्तविक रूप से कूटनीतिक समाधान चाहता है, तो उसे धौंस और आर्थिक दबाव की रणनीति को त्यागकर रचनात्मक संवाद का मार्ग अपनाना चाहिए।
वैध अधिकारों और प्रतिबद्धताओं के सम्मान पर जोर
राष्ट्रपति ने जोर देकर कहा कि अमेरिका को अंतरराष्ट्रीय नियमों और दोनों पक्षों के बीच पूर्व में तय प्रतिबद्धताओं का ईमानदारी से पालन करना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई भी कूटनीतिक प्रगति ईरान के वैध अधिकारों के पूर्ण सम्मान और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के दायरे में ही संभव है। पेजेशकियन ने यह भी उम्मीद जताई कि यदि दोनों पक्षों में राजनीतिक इच्छाशक्ति और परस्पर सहयोग की भावना रहे, तो द्विपक्षीय समझौतों के लक्ष्यों को प्राप्त किया जा सकता है।
MoU की 60 दिनों की समयसीमा समाप्त
उल्लेखनीय है कि 18 जून को अमेरिका और ईरान के बीच एक महत्वपूर्ण सहमति पत्र (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए थे। इसके तहत दोनों पक्षों को एक स्थायी और अंतिम समझौते पर पहुंचने के लिए 60 दिनों के भीतर वार्ता प्रक्रिया पूरी करनी थी। यह तय समयसीमा 17 अगस्त को समाप्त हो चुकी है। हाल के हफ्तों में बढ़े तनाव और अविश्वास के कारण इस वार्ता की अगली रूपरेखा और भविष्य को लेकर फिलहाल असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
अमेरिकी प्रतिबंधों के बीच ईरान का कड़ा रुख
पेजेशकियन का यह कड़ा बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका ने तेहरान पर दबाव बढ़ाते हुए नए आर्थिक प्रतिबंधों की घोषणा की है। अमेरिकी प्रशासन ने करीब 60 व्यक्तियों, संस्थाओं और जहाजों को निशाना बनाते हुए ताजा पाबंदियां लगाई हैं।
ईरान ने इन प्रतिबंधों का कड़ा विरोध करते हुए स्पष्ट किया है कि वह बाहरी दबावों के आगे नहीं झुकेगा। ईरानी अधिकारियों ने दोहराया है कि अमेरिकी प्रतिबंधों और राजनीतिक दबाव के बावजूद तेहरान अपनी राष्ट्रीय, आर्थिक और संप्रभु नीतियों पर पूरी मजबूती से कायम रहेगा तथा किसी भी अनुचित कार्रवाई का आवश्यक कूटनीतिक जवाब देगा