अप्रवासी राजस्थानी लिख सकते हैं निवेश-सोशल-इन्फ्रा की नई इबारत

अप्रवासी राजस्थानी लिख सकते हैं निवेश-सोशल-इन्फ्रा की नई इबारत

| लोकेंद्र सिंह शेखावत

जयपुर। बुधवार को आयोजित अप्रवासी राजस्थानी सम्मेलन राज्य के आगामी आर्थिक एवं सामाजिक विकास में मील का पत्थर सिद्ध हो सकता है। सम्मेलन में शामिल प्रवासी समुदाय से जुड़े उद्यमियों, उद्योगपतियों और सामाजिक नेतृत्वकर्ताओं ने स्पष्ट संदेश दिया कि वे राजस्थान में बड़े पैमाने पर औद्योगिक निवेश, रोजगार सृजन और सामाजिक अवसंरचना के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने को तैयार हैं—बस आवश्यक है सरकार, प्रशासन और नीति-निर्माताओं द्वारा ईमानदार सहयोग और सहज वातावरण।

इसी संदर्भ में उद्योग जगत की सक्रिय इकाई ‘टीम आरतिया’ ने इसे राजस्थान के लिए बड़ा अवसर बताया। टीम आरतिया के नेताओं—विष्णु भूत, कमल कंदोई, आशीष सर्राफ, जसवंत मील, अजय गुप्ता, ज्ञान प्रकाश, प्रेम बियाणी, कैलाश शर्मा, ओ.पी. राजपुरोहित, सज्जन सिंह, राजीव सिंहल, सुनील बंसल, पवन शर्मा, सुमित विजय, रमेश मित्तल, दिनेश गुप्ता, तरुण सारड़ा, एच.एम. जौहरी और आयुष जैन—का कहना है कि प्रवासी राजस्थानी भावनात्मक रूप से राज्य से जुड़े हैं और यदि उन्हें भरोसेमंद सहयोग मिले, तो वे “कलेजा खोलकर” राजस्थान को दे सकते हैं।

राजस्थान औद्योगिक विकास का नया दौर शुरू कर सकता है

टीम आरतिया ने कहा कि अभी भी राजस्थान में बड़े पैमाने पर उद्योग स्थापित होने की अपार संभावनाएँ मौजूद हैं। फिलहाल राज्य सीमेंट और जिंक जैसे प्रमुख सेक्टरों तक सीमित है, जबकि—

🔹 इलेक्ट्रॉनिक्स एवं इलेक्ट्रिकल निर्माण
🔹 खिलौना उद्योग
🔹 मेडिकल उपकरण
🔹 कृषि-आधारित प्रसंस्करण
🔹 मटेरियल साइंस-आधारित उत्पाद

जैसे क्षेत्रों में अरबों-खरबों के निवेश की संभावनाएँ हैं।

सोलर ऊर्जा में देश-स्तरीय निवेश, राज्य के संभावनाशील औद्योगिक माहौल की मजबूत मिसाल बताया गया।


सरकारी तंत्र पर भरोसा जताया गया

टीम ने कहा कि—

  • उद्योग विभाग,
  • बीआईपी,
  • रीको,
  • और राजस्थान फाउंडेशन

प्रवासी परिवारों को राज्य से जोड़ने में लगातार सक्रिय हैं। इससे नए निवेशकों को ग्राउंड लेवल पर रास्ता मिलता दिख रहा है।

टीम का सुझाव रहा कि सरकार ‘अप्रवासी निवेश बोर्ड’ बनाए, जो निवेशकों की फ़ाइल, जमीन, बिजली-पानी-नेटवर्क, सड़क संपर्क, परियोजना अनुमतियों और लाइसेंस संबंधी मामलों को एक ही विंडो से सुगम करवाए।

राजस्थान के लिए पाँच प्रमुख थ्रस्ट सेक्टर प्रस्तावित

टीम आरतिया के अनुसार निम्न पाँच क्षेत्रों में राजस्थान अंतरराष्ट्रीय पहचान बना सकता है—

① पर्यटन क्षेत्र

राजस्थान को “सस्टेनेबल, थीम-आधारित एवं हाई-स्पेंडिंग टूरिस्ट डेस्टिनेशन” बनाया जा सकता है।

② विश्वस्तरीय एजुकेशन हब

विदेशी विश्वविद्यालयों और निजी शिक्षा-संस्थानों का निवेश आकर्षित करने की क्षमता।

③ मेडिकल एवं हेल्थ-इंफ्रास्ट्रक्चर

सुपर-स्पेशियलिटी, मेडिकल उपकरण निर्माण और हेल्थ टेक-सेवाएँ शामिल।

④ इलेक्ट्रिकल-इलेक्ट्रॉनिक्स एवं खिलौना निर्माण

औद्योगिक क्लस्टर्स की स्थापना से हजारों रोजगार संभावित।

⑤ वैज्ञानिक अनुसंधान व नवाचार

एडवांस लैब्स, नवाचार केंद्र और स्टार्ट-अप इनक्यूबेशन को बढ़ावा।

टीम का मानना है कि प्रवासी परिवार इन क्षेत्रों में विश्वस्तरीय स्टैंडर्ड्स के साथ निवेश कर सकते हैं।

भामाशाह मॉडल में बड़े अवसर

टीम आरतिया ने कहा कि अप्रवासी परिवार अपने गाँव-कस्बों में—

स्कूलों का कायाकल्प,
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की उन्नति,
जल संरचनाओं का विस्तार,
सामुदायिक भवन,
स्मार्ट लाइब्रेरी,
डिजिटल क्लासरूम

जैसे कार्यों में करोड़ों रुपये लगा सकते हैं।

इसके लिए सुझाव दिया गया—

🔸 ग्राम व उपखंड अधिकारियों को विशेष दायित्व दिए जाएँ।
🔸 प्रवासी परिवारों को उनके गाँव-नगरों का दौरा करवाया जाए।
🔸 उनके नाम से विकास कार्यों को समयबद्ध पूरा किया जाए।

टीम का कहना है कि सामाजिक इन्फ्रा में धन लगाने के बाद, प्रवासी परिवार भावनात्मक रूप से राज्य से और अधिक जुड़ जाते हैं, जिससे भविष्य में औद्योगिक निवेश भी बढ़ता है।

सम्मेलन का निष्कर्ष

  • सरकार यदि अनुकूल प्रशासनिक ढांचा बनाती है,
  • भावनात्मक जुड़ाव की रणनीति अपनाती है,
  • और निर्णय-लेने की प्रक्रिया तेज करती है,

तो अप्रवासी राजस्थानी राज्य के विकास में—

अरबों-खरबों रुपये का निवेश कर सकते हैं
नए उद्योग स्थापित कर सकते हैं
रोजगार का बड़ा आधार निर्माण कर सकते हैं
सामाजिक ढांचा मजबूत कर सकते हैं

राजस्थान सरकार, प्रवासी समाज और उद्योगों के बीच साझेदारी विकसित हो जाए तो निकट भविष्य में राजस्थान की अर्थव्यवस्था राष्ट्रीय स्तर पर नई ऊँचाइयों को छू सकती है।

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