अन्नदाता से ऊर्जादाता: एथेनॉल सम्मिश्रण कार्यक्रम से संवर रही किसानों की तकदीर, घटेगा कच्चा तेल आयात

नई दिल्ली /नरेश गुनानी/भारत का महत्वाकांक्षी एथेनॉल सम्मिश्रण कार्यक्रम (Ethanol Blending Program) देश की ऊर्जा सुरक्षा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा गेम-चेंजर साबित हो रहा है। किसानों की आय बढ़ाने, कच्चे तेल के भारी-भरकम आयात बिल में कटौती करने और भारत को ऊर्जा क्षेत्र में ‘आत्मनिर्भर’ बनाने के उद्देश्य से शुरू किया गया यह कार्यक्रम अब अपनी रंग लाने लगा है।

​इस ऐतिहासिक बदलाव पर भारतीय कृषक समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष कृष्ण वीर चौधरी ने खुशी जताते हुए कहा, “देश के लिए यह एक गर्व का मील का पत्थर है कि हमारे पारंपरिक अन्नदाता अब गर्व से ‘ऊर्जादाता’ की भूमिका में कदम रख रहे हैं।”

​विविध स्रोतों से हो रहा एथेनॉल का उत्पादन

​एथेनॉल उत्पादन को केवल चीनी उत्पादन तक सीमित न रखते हुए सरकार और उद्योग जगत अब इसके लिए विविध कृषि उत्पादों का उपयोग कर रहे हैं। वर्तमान में एथेनॉल का निर्माण निम्नलिखित कृषि सामग्रियों से किया जा रहा है:

  • ​गन्ने के उप-उत्पाद: बी-हेवी मोलासेस (B-heavy molasses), सी-हेवी मोलासेस (C-heavy molasses) और सीधे गन्ने का रस (Sugarcane juice)।
  • ​अनाज आधारित स्रोत: टूटा हुआ चावल (Broken rice), मक्का (Maize) और खराबी के कारण खाद्य योग्य न बचा क्षतिग्रस्त खाद्यान्न (Damaged food grains)।

​इन बहुविध स्रोतों के उपयोग से एथेनॉल उत्पादन की क्षमता में तेजी से वृद्धि हुई है, जिससे खाद्य सुरक्षा को प्रभावित किए बिना स्वच्छ ईंधन का निर्माण सुनिश्चित किया जा रहा है।

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1. किसानों की आय में निरंतर वृद्धि

​गन्ने के साथ-साथ मक्का और टूटे चावल जैसे अनाजों के एथेनॉल उत्पादन में इस्तेमाल से किसानों को अपनी फसलों का बेहतर और स्थिर मूल्य मिल रहा है। इससे फसल की बर्बादी कम हुई है और किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है।

​2. विदेशी मुद्रा की बचत

​भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। एथेनॉल को पेट्रोल में मिलाने से कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटी है, जिससे देश के अरबों डॉलर की विदेशी मुद्रा की बचत हो रही है।

​3. हरित ऊर्जा और पर्यावरण सुरक्षा

​पेट्रोलियम ईंधन के स्थान पर एथेनॉल के उपयोग से कार्बन उत्सर्जन में गिरावट आ रही है, जो भारत के नेट-जीरो कार्बन लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है।

​भविष्य की राह

​सरकार के एथेनॉल सम्मिश्रण लक्ष्यों की दिशा में मिली यह सफलता भारतीय कृषि के लिए एक नया अध्याय खोल रही है। कृषि उत्पाद अब केवल भोजन की आवश्यकता पूरी करने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे देश की गाड़ियों और उद्योगों को चलाने वाले स्वच्छ ईंधनों का मुख्य स्रोत बन रहे हैं।

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