नरेश गुनानी
नई दिल्ली | 22 अप्रैल, 2026
भारत सरकार की महत्वाकांक्षी सामाजिक सुरक्षा योजना, अटल पेंशन योजना (APY) ने सफलता की नई ऊंचाइयों को छूते हुए एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। 21 अप्रैल, 2026 तक इस योजना से जुड़ने वाले कुल ग्राहकों (अभिदाताओं) की संख्या 9 करोड़ के आंकड़े को पार कर गई है।
पेंशन निधि विनियामक और विकास प्राधिकरण (PFRDA) द्वारा प्रशासित यह योजना देश के असंगठित क्षेत्र के लोगों को बुढ़ापे में वित्तीय सुरक्षा प्रदान करने का सबसे बड़ा माध्यम बनकर उभरी है।
वित्त वर्ष 2025-26: रिकॉर्ड तोड़ नामांकन
ताजा आंकड़ों के अनुसार, केवल चालू वित्त वर्ष (2025-26) के दौरान ही 1.35 करोड़ से अधिक नए ग्राहकों ने इस योजना में अपना नामांकन कराया है। योजना की शुरुआत के बाद से किसी एक वित्तीय वर्ष में दर्ज किया गया यह अब तक का सबसे अधिक नामांकन है, जो इसकी बढ़ती लोकप्रियता और पहुंच को प्रमाणित करता है।
एक दशक का सफल सफर
9 मई, 2015 को शुरू की गई इस योजना का मुख्य उद्देश्य गरीब, वंचित और असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए एक सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा प्रणाली बनाना था। पिछले 10 वर्षों में इस योजना की सफलता के पीछे कई कारकों का योगदान रहा है:
- संस्थागत प्रयास: सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (RRB), डाक विभाग और सहकारी बैंकों का व्यापक नेटवर्क।
- प्रशासनिक सक्रियता: PFRDA द्वारा चलाए गए जन-जागरूकता अभियान, बहुभाषी प्रचार सामग्री और नियमित समीक्षा बैठकें।
- सरकारी सहयोग: केंद्र सरकार और राज्य स्तरीय बैंकर्स समितियों (SLBC) का निरंतर समन्वय।
क्या है अटल पेंशन योजना? (मुख्य लाभ)
अटल पेंशन योजना को ‘सम्पूर्ण सुरक्षा कवच’ के रूप में डिजाइन किया गया है, जो ग्राहकों को त्रिस्तरीय लाभ सुनिश्चित करती है:
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- निश्चित मासिक पेंशन: 60 वर्ष की आयु पूरी होने पर ग्राहक को ₹1,000 से ₹5,000 तक की गारंटीकृत मासिक पेंशन मिलती है।
- जीवनसाथी को सुरक्षा: अभिदाता की मृत्यु की स्थिति में, उतनी ही पेंशन राशि उनके पति या पत्नी को आजीवन मिलती रहती है।
- कॉर्पस की वापसी: दोनों (अभिदाता और जीवनसाथी) के निधन के बाद, 60 वर्ष की आयु तक जमा की गई पूरी संचित राशि नामांकित व्यक्ति (Nominee) को लौटा दी जाती है।
पात्रता मानदंड: > इस योजना का लाभ 18 से 40 वर्ष की आयु का कोई भी भारतीय नागरिक उठा सकता है, बशर्ते वह आयकरदाता (Income Taxpayer) न हो।
इस उपलब्धि पर विशेषज्ञों का मानना है कि नामांकन में आई यह भारी वृद्धि दर्शाती है कि भारतीय कार्यबल अब अपने भविष्य और सेवानिवृत्ति के प्रति अधिक जागरूक हो रहा है। डिजिटल बैंकिंग और गांवों तक फैली बैंक शाखाओं ने इस सुरक्षा तंत्र को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई है।