राजस्थान
अजमेर: 243 करोड़ की लागत से बने रामसेतु ब्रिज की गुणवत्ता पर सवाल, जमीन धंसने के बाद कोर्ट में याचिका दायर
Edited By : नरेश गुनानी
टेलीग्राफ टाइम्स
जुलाई 06,2025
हरिप्रसाद शर्मा, अजमेर।
अजमेर में 243 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किए गए बहुप्रतीक्षित रामसेतु एलिवेटेड ब्रिज की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। 3 जुलाई को इस ब्रिज की सतह पर एक हिस्से में जमीन धंसने की घटना सामने आने के बाद अब इसे लेकर अदालत का दरवाजा खटखटाया गया है।
शनिवार को एक जागरूक नागरिक की ओर से दो प्रतिवादियों ने अजमेर कोर्ट में वाद दायर किया, जिसमें निर्माण कार्य में लापरवाही बरतने के आरोप लगाए गए हैं। याचिका में ठेकेदार, निर्माण कंपनी और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ जांच की मांग की गई है। मामले की सुनवाई सोमवार को होगी, जिसमें 15 से अधिक अधिवक्ताओं द्वारा पैरवी की जाएगी।
एलिवेटेड ब्रिज, अब “रामसेतु” के नाम से चर्चित
ब्रिज की तकनीकी जानकारी देते हुए एडवोकेट विवेक पाराशर ने बताया कि इसे पहले “एलिवेटेड रोड” के नाम से जाना जाता था, जिसे अब “रामसेतु ब्रिज” के नाम से जाना जाता है। इस ब्रिज का निर्माण कार्य तीन वर्ष पूर्व पूरा हुआ था। 243 करोड़ रुपये की लागत से बना यह ब्रिज शुरू से ही विवादों में घिरा रहा। निर्माण के समय से ही स्थानीय स्तर पर इसका विरोध होता रहा था।
याचिका में ये मुख्य मांगे रखी गईं
याचिकाकर्ता जितेश धनवानी ने जानकारी दी कि याचिका में निम्न प्रमुख बिंदुओं पर ध्यान देने की मांग की गई है:
- ब्रिज निर्माण में उपयोग की गई सामग्री की गुणवत्ता व मापदंडों की जांच की जाए।
- निर्माण कार्य में लापरवाही के दोषियों – ठेकेदार, कंपनी और अधिकारियों – के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
- निर्माण कार्य में देरी के बावजूद लगाए गए पेनल्टी को माफ किए जाने की प्रक्रिया की जांच कर दोषियों से वसूली कर उसे राजकोष में जमा किया जाए।
- जब तक ब्रिज की संरचनात्मक सुरक्षा की जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक इसे आवागमन के लिए बंद रखा जाए।
राजनीतिक मुद्दा भी बनता जा रहा मामला
एडवोकेट पाराशर ने बताया कि घटना के बाद राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। कई राजनीतिक दलों और जनप्रतिनिधियों ने इस घटना को प्रशासनिक विफलता करार दिया है और पारदर्शी जांच की मांग की है। वहीं आम जनता में भी भविष्य में दुर्घटनाओं की आशंका को लेकर डर का माहौल है।
न्यायिक सुनवाई आज, बड़ी कानूनी टीम मैदान में
मामले की सुनवाई सोमवार (आज) अजमेर कोर्ट में होगी, जिसमें 15 से अधिक अधिवक्ता याचिकाकर्ताओं की ओर से सशक्त पैरवी करेंगे। कोर्ट से न्यायिक जांच और ठोस कार्रवाई की उम्मीद की जा रही है।
निगरानी समिति गठित करने की भी मांग
याचिका में यह भी प्रस्ताव रखा गया है कि ब्रिज की गुणवत्ता व भविष्य की सुरक्षा को लेकर एक स्वतंत्र तकनीकी समिति या निगरानी समिति गठित की जाए, जो नियमित निरीक्षण कर नागरिकों को आश्वस्त कर सके।
रामसेतु ब्रिज की जमीन धंसने की घटना ने न केवल निगम और निर्माण एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिन्ह लगा दिया है, बल्कि अजमेर शहर की आधारभूत संरचना की सुरक्षा को लेकर भी चिंताएं खड़ी कर दी हैं। अब देखना यह है कि कोर्ट इस मामले में क्या दिशा निर्देश देता है और दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है।