अजमेर रेंज बना प्रदेश का आदर्श मॉडल, अपराध नियंत्रण में रचा इतिहास

अजमेर रेंज बना प्रदेश का आदर्श मॉडल, अपराध नियंत्रण में रचा इतिहास
आईटीएसएसओ की रिपोर्ट में अपराध दर में सर्वाधिक गिरावट, यौन उत्पीड़न मामलों के निपटारे में दूसरा स्थान

Edited By : नरेश गुनानी
टेलीग्राफ टाइम्स
जून 24,2025

रिपोर्ट: हरिप्रसाद शर्मा, /अजमेर राजस्थान की अजमेर रेंज ने पुलिस प्रशासन, अपराध नियंत्रण और न्याय दिलाने की प्रक्रिया में नई मिसाल कायम की है। आईटीएसएसओ (Indian Transparency & State Security Organisation) की मई 2025 में जारी रिपोर्ट के मुताबिक, अजमेर रेंज ने न केवल अपराध नियंत्रण के क्षेत्र में पूरे प्रदेश में पहला स्थान प्राप्त किया है, बल्कि महिला यौन उत्पीड़न मामलों के निपटारे में दूसरा स्थान हासिल किया है।

रेंज के डीआईजी ओमप्रकाश मेघवाल ने मंगलवार को प्रेस वार्ता में इन उपलब्धियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बेहतर रणनीति, प्रशासनिक सुधार, त्वरित जांच और आमजन की सहभागिता के चलते यह परिणाम संभव हो पाया है।


📊 अपराध दर में 17% की गिरावट

डीआईजी मेघवाल के अनुसार,

  • मई 2024 में कुल 12,713 अपराध प्रकरण दर्ज हुए थे।
  • जबकि मई 2025 में यह संख्या घटकर 10,515 रह गई।
  • यानी 2,198 मामलों की कमी, जो कुल मिलाकर 17.29% की गिरावट को दर्शाती है।

यह गिरावट राजस्थान राज्य में सर्वाधिक है और यह दर्शाता है कि अपराधियों पर पुलिस की पकड़ पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हुई है।


👩‍⚖️ महिला अत्याचार व यौन उत्पीड़न में ठोस कार्रवाई

महिलाओं के विरुद्ध अपराधों पर नियंत्रण को लेकर भी रिपोर्ट में सकारात्मक संकेत मिले हैं।

  • मई 2024 में ऐसे 2,548 प्रकरण दर्ज हुए थे।
  • जबकि मई 2025 में यह संख्या घटकर 2,387 पर आ गई।
  • यानी 6.32% की गिरावट दर्ज की गई।

इस श्रेणी में अजमेर रेंज ने प्रदेश में चौथा स्थान पाया, जबकि यौन उत्पीड़न मामलों के त्वरित निपटारे में दूसरे स्थान पर रहा।


📉 अनुसूचित जनजाति व संपत्ति से जुड़े अपराधों में ऐतिहासिक गिरावट

  • एसटी वर्ग से जुड़े अपराधों में 34.29% की गिरावट।
  • संपत्ति संबंधी अपराधों में 38.73% की कमी।
  • यह दोनों आँकड़े प्रदेश में सर्वाधिक गिरावट के रूप में दर्ज किए गए हैं।

⚖️ 164 मामलों में दोषियों को मिली सजा

डीआईजी मेघवाल ने बताया कि वर्ष 2024-25 के दौरान

  • पॉक्सो एक्ट, बलात्कार, और एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम से जुड़े 164 मामलों में आरोपियों को सजा दिलवाई गई है।

इससे यह स्पष्ट होता है कि न केवल अपराधों को रोका गया है, बल्कि न्याय प्रक्रिया में भी तेजी लाई गई है।


🛡️ प्रशासनिक सुधार और ई-सुनवाई की व्यवस्था

  • रेंज में 20 पदोन्नति बोर्डों का गठन किया गया, जिससे 400 से अधिक पुलिसकर्मियों को पदोन्नति मिली।
  • ई-सुनवाई प्रणाली को लागू कर आम नागरिकों को समय पर न्याय दिलाने और पुलिस तक सीधे पहुंच बनाने में मदद मिली।
  • इससे पुलिस प्रशासन में पारदर्शिता आई और आमजन का भरोसा भी बढ़ा।

📈 रैंकिंग में जबरदस्त छलांग

  • जुलाई 2024 में अजमेर रेंज का रैंक आईटीएसएसओ रिपोर्ट में 12वां स्थान था।
  • लेकिन मई 2025 तक यह सीधे दूसरे स्थान पर पहुंच गया।

इस उपलब्धि के पीछे सतत निगरानी, आधुनिक तकनीक का प्रयोग, सामुदायिक पुलिसिंग और नेतृत्व की निर्णायक भूमिका रही।


📌 अजमेर रेंज बना पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणास्रोत

डीआईजी ओमप्रकाश मेघवाल ने कहा –

“हमने अपराध नियंत्रण, न्याय दिलाने और पुलिस-जन संवाद के क्षेत्र में जो प्रयास किए, उसके परिणाम आज सबके सामने हैं। अजमेर रेंज प्रदेश में एक आदर्श मॉडल बन चुका है।”

अजमेर रेंज की यह प्रगति न केवल प्रशासनिक दृष्टि से उल्लेखनीय है, बल्कि पूरे राजस्थान के लिए एक रोल मॉडल के रूप में उभरी है। अपराधियों में डर, आमजन में विश्वास और न्याय प्रक्रिया में तेजी—यही वह संतुलन है जो किसी भी पुलिस रेंज को उत्कृष्ट बनाता है, और अजमेर रेंज ने यह कर दिखाया है।


 

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