अजमेर/ नरेश गुनानी/राष्ट्रीय सिंधी भाषा विकास परिषद (एनसीपीएसएल) एवं सिंधी संगीत समिति अजमेर के संयुक्त तत्वाधान में अजमेर के होटल मेट्रो-इन में विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने कहा कि वर्ष 1947 में हुआ भारत का विभाजन दुनिया का सबसे बड़ा मजबूरी का पलायन था।
विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने विस्थापन के दर्द को बयां करते हुए कहा कि इतिहास के इस काले अध्याय को केवल सरकारी दस्तावेजों या संपत्ति के आंकड़ों से नहीं समझा जा सकता। विभाजन का वास्तविक इतिहास उस वृद्ध की आंखों में है जिसने अपने घर की अंतिम चौखट को देखा, उस मां के दर्द में है जिसने यात्रा के दौरान अपने बच्चे को चुप कराया और उन मौन स्मृतियों में सुरक्षित है जिन्हें लोगों ने अपने दिलों में छुपा कर रखा।
शून्य से शुरुआत कर बनाई नई पहचान
वासुदेव देवनानी ने समाज के गौरवशाली सफर की सराहना करते हुए कहा:
”जिस सिंधी समाज से इतिहास ने उसका भूगोल छीन लिया, उसने अपने कड़े परिश्रम से अपना नया भविष्य निर्मित किया। समाज ने स्वयं को कभी विस्थापित कहकर जीवन की इतिश्री नहीं की, बल्कि शिक्षा, व्यापार, उद्यम और समाजसेवा के बल पर स्वयं को निर्माता के रूप में पुनस्थापित किया।”
उन्होंने आगे कहा कि अजमेर, जयपुर, जोधपुर सहित देश के अनेक शहरों में समाज ने शून्य से शुरुआत कर प्रगति की नई मिसाल कायम की है।
मातृभाषा के संरक्षण पर चिंता और युवाओं को संदेश
मातृभाषा के संरक्षण पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि भाषा केवल ध्वनि नहीं, बल्कि स्मृति की संरचना होती है। किसी समाज का सांस्कृतिक पतन तब शुरू होता है जब उसकी अगली पीढ़ी पूर्वजों की भाषा बोलना बंद कर देती है। सिंधी भाषा की रक्षा केवल एक समुदाय की मांग नहीं, बल्कि भारत की बहुलतामूलक सभ्यता की रक्षा का प्रश्न है।
युवाओं को प्रेरित करते हुए उन्होंने कहा:
- अपनी जड़ों से जुड़ाव: जड़ों से जुड़े रहना आधुनिकता से पीछे हटना नहीं है।
- वैश्विक ज्ञान और संस्कार: युवा विश्व की भाषाएं सीखें, विज्ञान और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) सीखें, वैश्विक अर्थव्यवस्था में प्रवेश करें, लेकिन घर लौटकर अपने दादा-दादी की भाषा में बात करने की क्षमता को आधुनिकता की कीमत न बनने दें।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और प्रतिभा सम्मान
कार्यक्रम संयोजक घनश्याम ठारवानी ने बताया कि कार्यक्रम का शुभारंभ भारत माता के चित्र पर माल्यार्पण के साथ हुआ।
- सांस्कृतिक कार्यक्रम: लोक गायक घनश्याम भगत ने देशभक्ति गीतों की मनमोहक प्रस्तुतियां दीं। स्वामी सर्वानंद विद्या मंदिर के बच्चों ने वंदे मातरम की प्रस्तुति दी और राष्ट्रभक्ति से ओत-प्रोत लघु नृत्य नाटिका पेश की।
- प्रतिभा सम्मान: पूर्व पार्षद रमेश चेलानी ने जानकारी दी कि इस अवसर पर समाज के प्रतिभाशाली बच्चों को सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता राष्ट्रीय सिंधी भाषा विकास परिषद के सदस्य मनीष देवनानी ने नई पीढ़ी को मातृभाषा से जोड़ने पर जोर दिया। इसके अलावा सम्राट पृथ्वीराज चौहान महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य डॉ. हासो दादलानी एवं राजकीय अल्प भाषाई शिक्षक प्रशिक्षण संस्थान की व्याख्याता लता ठारवानी ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि के रूप में झूलेलाल सिंधी सेंट्रल पंचायत के अध्यक्ष राजा डी. थारवानी, समाजसेवी रामचंद्र गुलाबानी, गोविंद खटवानी, विजय शाहानी, चंद्र लखानी, जितेंद्र रंगवानी, अशोक मंगलानी और भगवान वरलानी का सराहनीय सहयोग रहा। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।