38 साल बाद मिला दूसरा राजकीय विश्वविद्यालय
| गौरव कोचर
जयपुर, 9 मार्च 2026 राजस्थान विधान सभा में सोमवार को एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए ‘राजस्थान आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा विश्वविद्यालय अजमेर विधेयक, 2026’ को ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। इस विश्वविद्यालय की स्थापना के साथ ही अजमेर में करीब चार दशकों (38 वर्ष) का सूखा समाप्त हुआ है और जिले को दूसरा राजकीय विश्वविद्यालय मिला है।
वासुदेव देवनानी का सपना हुआ साकार
विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने विधेयक पारित होने पर हर्ष व्यक्त करते हुए इसे अपनी व्यक्तिगत और क्षेत्रीय विकास की एक बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा के नेतृत्व में अजमेर के लिए देखा गया उनका यह पुराना सपना आज हकीकत में बदल गया है। यह संस्थान न केवल शिक्षा बल्कि भारतीय चिकित्सा पद्धतियों के संरक्षण का केंद्र बनेगा।
अनुसंधान और स्वास्थ्य सेवाओं को मिलेगा नया आयाम
सदन में चर्चा के दौरान उप मुख्यमंत्री और आयुर्वेद मंत्री डॉ. प्रेम चंद बैरवा ने विश्वविद्यालय के महत्व पर प्रकाश डाला:
- पारंपरिक चिकित्सा का सुदृढ़ीकरण: यह कदम राज्य सरकार के ‘स्वस्थ राजस्थान से समृद्ध राजस्थान’ के संकल्प को पूरा करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।
- बहु-विषयी शिक्षा: यहाँ आयुर्वेद, यूनानी, योग, होम्योपैथी, सिद्ध और प्राकृतिक चिकित्सा जैसे विषयों में उच्च स्तरीय शिक्षा और शोध (Research) की सुविधा मिलेगी।
- नवाचार और आविष्कार: विश्वविद्यालय में भारतीय चिकित्सा पद्धतियों में होने वाले आधुनिक आविष्कारों को पाठ्यक्रम और अनुसंधान में शामिल किया जाएगा।
प्रशासनिक संरचना और संसाधन
विधेयक के अनुसार, विश्वविद्यालय का संचालन व्यवस्थित रूप से करने के लिए विभिन्न बोर्ड और समितियों का गठन किया जाएगा:
- प्रबंधन: कुलाधिपति द्वारा कुलगुरू की नियुक्ति के पश्चात प्रबंध बोर्ड का गठन होगा। इसके अतिरिक्त विद्या, संकाय, वित्त, लेखा, अनुसंधान और छात्र कल्याण के लिए समर्पित बोर्ड होंगे।
- राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP): सभी संकायों में अध्ययन की प्रक्रिया राष्ट्रीय शिक्षा नीति के मानकों के अनुरूप संचालित की जाएगी।
- भूमि आवंटन: विश्वविद्यालय के परिसर के लिए अजमेर स्थित महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय की भूमि में से 11.93 हेक्टेयर क्षेत्र आवंटित कर दिया गया है।
