(हरिप्रसाद शर्मा) अजमेर। अजमेर स्थित विश्व प्रसिद्ध ख्वाजा गरीब नवाज की दरगाह में शिव मंदिर होने के दावे को लेकर दायर याचिका पर शनिवार को जिला न्यायालय में गहमागहमी के बीच सुनवाई हुई। इस संवेदनशील मामले में नया मोड़ तब आया जब अदालत में पक्षकार बनने के लिए आवेदनों की झड़ी लग गई। सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 1/10 के तहत दायर इन प्रार्थना पत्रों पर घंटों तक लंबी और जोरदार बहस चली। सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 6 मई 2026 की तिथि निर्धारित की है।
अदालत परिसर में रहा हलचल का माहौल
सुनवाई के दौरान सुरक्षा और संवेदनशीलता को देखते हुए अदालत परिसर में भारी हलचल रही। इस मौके पर वादी विष्णु गुप्ता, महाराणा प्रताप सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजवर्धन सिंह परमार, दरगाह अंजुमन कमेटी के सचिव सरवर चिश्ती, दरगाह दीवान के कानूनी प्रतिनिधि सहित बड़ी संख्या में खादिम और अधिवक्ता उपस्थित रहे।
पक्षकार बनने के लिए आए 12 आवेदन
न्यायालय को अवगत कराया गया कि अब तक कुल 12 आवेदन पक्षकार बनने के लिए पेश किए जा चुके हैं।
- राजवर्धन सिंह परमार ने स्वयं को वादी के रूप में शामिल करने की मांग की है।
- अन्य अधिकांश आवेदकों ने प्रतिवादी (Defense) के तौर पर जुड़ने के लिए प्रार्थना पत्र दिए हैं।
वादी पक्ष का तर्क: ‘प्रक्रिया को जटिल न बनाया जाए’
वादी पक्ष के अधिवक्ता संदीप कुमार ने दलील दी कि इतनी बड़ी संख्या में पक्षकारों को शामिल करने से न्यायिक प्रक्रिया न केवल जटिल होगी, बल्कि सुनवाई में अनावश्यक देरी भी होगी। उन्होंने अदालत से आग्रह किया कि केवल उन्हीं को पक्षकार बनाया जाए जिनका मामले से सीधा संबंध हो और जो ठोस साक्ष्यों के आधार पर निस्तारण में सहयोग कर सकें।
अंजुमन कमेटी की मांग: ‘खादिमों का पक्ष सुनना जरूरी’
दरगाह अंजुमन कमेटी के सचिव सरवर चिश्ती ने ऐतिहासिक संदर्भों का हवाला देते हुए कहा कि दरगाह से देश-विदेश के लाखों लोगों की आस्था जुड़ी है। उन्होंने तर्क दिया कि खादिमों का इस स्थान से सदियों पुराना संबंध है, इसलिए इस कानूनी लड़ाई में उनका पक्ष सुना जाना अनिवार्य है। चिश्ती ने दरगाह की ‘गंगा-जमुनी तहजीब’ का जिक्र करते हुए कहा कि यहाँ हर धर्म के लोग आते हैं और वर्तमान में धार्मिक स्थलों को लेकर किए जा रहे दावों से सामाजिक सौहार्द प्रभावित हो रहा है।
अगला कदम: पात्रता पर फैसला
अदालत ने स्पष्ट किया है कि मुख्य याचिका पर सुनवाई शुरू करने से पहले यह तय किया जाएगा कि किन-किन आवेदकों को औपचारिक रूप से पक्षकार बनाया जाना उचित है।
अब 6 मई 2026 को होने वाली सुनवाई बेहद महत्वपूर्ण होगी, क्योंकि इसी दिन यह साफ होने की संभावना है कि इस कानूनी लड़ाई में कौन-कौन से चेहरे आमने-सामने होंगे। इस मामले पर न केवल राजस्थान बल्कि पूरे देश की नजरें टिकी हुई हैं।