अजमेर दरगाह विवाद: ‘अगर मुझे कुछ हुआ तो वे जिम्मेदार होंगे’, राजवर्धन सिंह परमार ने जताया जान का खतरा
|(हरिप्रसाद शर्मा) अजमेर। अजमेर दरगाह में हिंदू शिव मंदिर होने का दावा कर कानूनी लड़ाई लड़ रहे महाराणा प्रताप सेना के संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष राजवर्धन सिंह परमार ने एक बार फिर सनसनीखेज आरोप लगाए हैं। परमार ने सार्वजनिक रूप से अपनी जान को खतरा बताते हुए कहा है कि उन्हें लगातार धमकियां मिल रही हैं और भविष्य में किसी भी अनहोनी के लिए विशेष संगठनों को जिम्मेदार ठहराया है।
विवाद और सुरक्षा पर गंभीर आरोप
अजमेर न्यायालय में याचिका दायर करने के बाद चर्चा में आए राजवर्धन सिंह परमार का कहना है कि जब से उन्होंने दरगाह को हिंदू मंदिर बताकर मुद्दा उठाया है, तब से कुछ असामाजिक तत्व और संगठन उनके पीछे पड़ गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि:
- महाराष्ट्र स्थित “हज़रत ख्वाजा वेलफेयर फोरम” से जुड़े लोग उनके खिलाफ षडयंत्र रच रहे हैं।
- उन्हें डराने-धमकाने और माहौल खराब करने का प्रयास किया जा रहा है।
- परमार के अनुसार, उन पर पहले भी कई बार हमले हो चुके हैं, जिससे उनकी सुरक्षा पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा होता है।
पुरानी रंजिश और कानूनी कार्रवाई का हवाला
राजवर्धन सिंह परमार ने बताया कि यह विवाद नया नहीं है। उन्होंने याद दिलाया कि:
- मई 2022: इसी संगठन ने उनके खिलाफ अजमेर के एक थाने में शिकायत दर्ज कराई थी और आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग किया था।
- संसद मार्ग थाना (दिल्ली): 2022 में उन्होंने खुद भी अपनी सुरक्षा और धमकियों को लेकर दिल्ली में एफआईआर दर्ज करवाई थी। परमार का दावा है कि वही लोग अब फिर से सक्रिय होकर उन्हें निशाना बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
सरकार और प्रशासन से सुरक्षा की मांग
अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित परमार ने अजमेर पुलिस अधीक्षक, राजस्थान सरकार और केंद्रीय गृह मंत्रालय से तत्काल सुरक्षा मुहैया कराने की अपील की है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा:
”मैं संवैधानिक और कानूनी तरीके से अदालत में अपनी बात रख रहा हूं। मेरा उद्देश्य किसी की धार्मिक भावनाएं आहत करना नहीं, बल्कि ऐतिहासिक तथ्यों को सामने लाना है। इसके बावजूद मुझे जान से मारने की धमकियां दी जा रही हैं।”
प्रशासनिक सतर्कता
परमार के इन गंभीर आरोपों के बाद अजमेर में एक बार फिर सांप्रदायिक संवेदनशीलता बढ़ गई है। हालांकि, जिला प्रशासन या पुलिस की ओर से अभी तक इस पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन सूत्रों के अनुसार कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए खुफिया तंत्र को अलर्ट कर दिया गया है।
अदालत में मामले की सुनवाई के बीच परमार का यह ‘विक्टिम कार्ड’ या वास्तविक सुरक्षा चिंता, आने वाले दिनों में अजमेर की राजनीति और सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक गरमा सकता है।

