रिपोर्ट: हरिप्रसाद शर्मा, अजमेर।
अजमेर। विश्व प्रसिद्ध ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह परिसर में शिव मंदिर होने के दावे को लेकर चल रहा कानूनी विवाद शनिवार को एक बार फिर चर्चा में रहा। अजमेर जिला न्यायालय में इस संवेदनशील मामले पर हुई सुनवाई के दौरान विभिन्न संगठनों की याचिकाओं पर प्रारंभिक बहस की गई। कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अगली सुनवाई के लिए 2 मई 2026 की तिथि निर्धारित की है।
सीमित आवेदनों पर हुई चर्चा, हाईकोर्ट के हस्तक्षेप का असर
सुनवाई के बाद हिंदू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु गुप्ता ने मीडिया से मुखातिब होते हुए बताया कि उनकी ओर से कई महत्वपूर्ण आवेदनों पर बहस की तैयारी की गई थी, लेकिन न्यायालय ने केवल सीमित संख्या में ही आवेदनों पर सुनवाई की। उन्होंने इसके पीछे का कारण बताते हुए कहा कि मामले से जुड़े एक पक्षकार द्वारा राजस्थान हाईकोर्ट में अपील दायर करने के कारण निचली अदालत की प्रक्रिया में कुछ बदलाव आए हैं।
विष्णु गुप्ता के अनुसार, न्यायालय ने पूर्व में यह निर्देश दिए थे कि मामले में नए पक्षकार (Party) बनने के लिए जितने भी लंबित आवेदन हैं, उनका प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण किया जाए। फिलहाल, कोर्ट में कई संगठनों और व्यक्तियों की याचिकाएं लंबित हैं, जिन पर अभी तक अंतिम निर्णय नहीं हो पाया है।
2 मई की सुनवाई होगी बेहद अहम
कानूनी जानकारों का मानना है कि 2 मई को होने वाली सुनवाई इस पूरे प्रकरण में ‘टर्निंग पॉइंट’ साबित हो सकती है। उस दिन अदालत निम्नलिखित बिंदुओं पर फैसला ले सकती है:
- नए पक्षकारों का निर्धारण: किन-किन आवेदकों को इस कानूनी लड़ाई में शामिल किया जाएगा।
- लंबित आवेदनों का निस्तारण: पूर्व में दिए गए आवेदनों पर विस्तार से विचार कर उनकी वैधता तय की जाएगी।
- मुख्य मुद्दे की शुरुआत: पक्षकारों के तय होने के बाद ही मंदिर होने के दावे से जुड़े मुख्य तथ्यों पर बहस शुरू हो सकेगी।
बढ़ी संवेदनशीलता, सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
धार्मिक आस्था और ऐतिहासिक दावों से जुड़े होने के कारण यह मामला न केवल अजमेर बल्कि पूरे देश में सुर्खियां बटोर रहा है। शनिवार को सुनवाई के दौरान भी न्यायालय परिसर में सुरक्षा के कड़े प्रबंध देखे गए। आम जनता और कानूनी विशेषज्ञों की नजर अब पूरी तरह से मई में होने वाली कार्यवाही पर टिकी है, क्योंकि इसी दिन तय होगा कि यह मामला किस दिशा में आगे बढ़ेगा।