अजमेर दरगाह: खादिम लाइसेंस प्रक्रिया पर गहराया संकट, अंतिम तिथि से पूर्व एक भी आवेदन नहीं

अजमेर दरगाह: खादिम लाइसेंस प्रक्रिया पर गहराया संकट, अंतिम तिथि से पूर्व एक भी आवेदन नहीं

अजमेर, 4 जनवरी 2026:

| हरि प्रसाद शर्मा

​विश्व प्रसिद्ध ख्वाजा गरीब नवाज की दरगाह के 75 साल के इतिहास में पहली बार शुरू की गई खादिम लाइसेंस प्रक्रिया पूरी तरह ठप नजर आ रही है। दरगाह कमेटी द्वारा आवेदन की अंतिम तिथि 5 जनवरी 2026 निर्धारित की गई है, लेकिन समय सीमा समाप्त होने से महज एक दिन पहले तक नाजिम कार्यालय में एक भी आवेदन जमा नहीं हुआ है। इस स्थिति ने दरगाह प्रशासन और खादिम समुदायों के बीच चल रहे गतिरोध को और अधिक स्पष्ट कर दिया है।

तीन हजार खादिमों पर सीधा असर

​दरगाह की सेवा और व्यवस्थाओं से जुड़ी दो प्रमुख संस्थाओं के लगभग तीन हजार सदस्य इस नई व्यवस्था से प्रभावित हो रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार:

  • अंजुमन सैयद जादगान: लगभग 2200 सदस्य।
  • अंजुमन शेखजादगान: लगभग 800 सदस्य। इन दोनों अंजुमनों ने शुरुआत से ही इस प्रक्रिया का पुरजोर विरोध किया है, जिसका परिणाम शून्य आवेदन के रूप में सामने आया है।

प्रशासन का पक्ष: सुरक्षा और कानून का हवाला

​दरगाह नाजिम मोहम्मद बिलाल खान द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, यह पहल सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट के आदेशों और केंद्र व राज्य सरकार की गाइडलाइंस के अनुपालन में की गई है। प्रशासन का तर्क है कि:

  • ​यह व्यवस्था दरगाह सुरक्षा अंकेक्षण (Security Audit) रिपोर्ट के अनुरूप है।
  • ​’दरगाह ख्वाजा साहब अधिनियम 1955′ की धारा 11 (एफ) के तहत खादिमों की पहचान, मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) और जायरीन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लाइसेंस अनिवार्य हैं।

विरोध का स्वर: ‘परंपराओं के खिलाफ’

​दूसरी ओर, खादिम समुदाय इसे अपने मौलिक अधिकारों और दरगाह की सदियों पुरानी परंपराओं पर प्रहार मान रहा है। अंजुमन सैयद जादगान के सचिव सैयद सरवर चिश्ती ने इस निर्णय की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए इसे एक ‘तुगलकी फरमान’ करार दिया है। खादिमों का मानना है कि उनकी पहचान के लिए लाइसेंस की व्यवस्था अनावश्यक है और यह उनके पारंपरिक अधिकारों को सीमित करने की कोशिश है।

75 साल में पहली बार ऐसी पहल

​ऐतिहासिक दृष्टि से देखें तो दरगाह में अब तक 37 नाजिम अपना कार्यकाल पूरा कर चुके हैं, लेकिन वर्तमान नाजिम मोहम्मद बिलाल खान के कार्यकाल में पहली बार इस प्रकार की अनिवार्य लाइसेंसिंग की शुरुआत हुई है। पूर्व के सात दशकों में किसी भी प्रशासक ने इस दिशा में कदम नहीं बढ़ाया था।

5 जनवरी की समय सीमा समाप्त होने के बाद अब सबकी निगाहें दरगाह प्रशासन और जिला प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं। क्या प्रशासन आवेदन की तारीख बढ़ाएगा या विरोध को देखते हुए प्रक्रिया को स्थगित किया जाएगा, यह आने वाले कुछ दिनों में स्पष्ट होगा। फिलहाल, खादिमों के एकजुट विरोध ने इस ऐतिहासिक पहल के भविष्य पर सवालिया निशान लगा दिया है।

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