अजमेर जिले में धधक रही हैं अवैध कोयला भट्टियां
प्रशासन और वन विभाग की आँखों के सामने फल-फूल रहा करोड़ों का काला कारोबार
| रिपोर्ट हरि प्रसाद शर्मा पुष्कर
अजमेर/ विशेष रिपोर्ट
अजमेर जिले में अवैध कोयला भट्टियों का कारोबार इन दिनों प्रशासन और वन विभाग की नाक के नीचे खुलेआम फल-फूल रहा है। जिला भर में सैकड़ों की संख्या में सक्रिय ये भट्टियां न सिर्फ पर्यावरण को नुकसान पहुँचा रही हैं, बल्कि राजस्व हानि और कानून व्यवस्था की खुली धज्जियां भी उड़ा रही हैं। हालात यह हैं कि वन विभाग को पूरी जानकारी होने के बावजूद बड़े स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई अब तक नहीं हुई, जिससे अवैध कारोबारियों के हौसले और भी बुलंद हो गए हैं।
जिलेभर में सैकड़ों अवैध भट्टियां – हर उपखंड क्षेत्र में सक्रिय नेटवर्क
सूत्रों के अनुसार अजमेर जिले के पीसांगन, अजूबा का कबाडिया, गोला, गिगलपुरा, दौलत खेड़ा, सराधना, श्रीनगर, नूरीयावास, बुधवाड़ा, जेठाना, गोविंदगढ़, पिपरौली, टाटोटी, बांदनवाड़ा, गोवलिया, रामसर, अराई, ऊटड़ा, रीछमालिया रोड, नया गांव रोड, किशनगढ़ क्षेत्र, बबाईचा और भिनाय सहित लगभग हर उपखंड क्षेत्र में सैकड़ों अवैध कोयला भट्टियां संचालित हैं।
पिपरौली और ऊंटाडा क्षेत्र में तो कोयला उत्पादन का बड़ा अवैध नेटवर्क खुलेआम चलता दिख रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यह कारोबार दिन-रात बिना किसी रोक-टोक के जारी है।
वन विभाग की चुप्पी पर सवाल — नाममात्र की कार्रवाई, बड़े माफियाओं पर हाथ नहीं
हाल ही में अर्जुनपुरा और बिडिकचावास क्षेत्र में वन विभाग द्वारा केवल औपचारिकता निभाने जैसी छोटी कार्रवाई की गई, जबकि बड़े संचालकों पर कार्रवाई न होने से वन विभाग की नीयत पर सवाल उठ रहे हैं।
स्थानीय लोग खुलकर आरोप लगा रहे हैं कि विभाग को सब पता है, लेकिन “अनदेखी” की जा रही है।
बिना टीपी का खेल — सरकार को लग रहा करोड़ों का नुकसान
भट्टियों पर तैयार होने वाला कोयला बड़े स्टॉकिस्टों को बेचा जाता है।
यह कोयला —
- बिना ट्रांजिट पास (TP) के
- बिना किसी टैक्स
- बिना रिकॉर्ड
जिले से बाहर भेज दिया जाता है।
इससे—
- सरकार को राजस्व में करोड़ों रुपये का नुकसान
- अवैध व्यापारियों को मोटा मुनाफा
- और विभागीय कर्मचारियों की मिलीभगत पर सवाल
उठ रहे हैं।
कृषि भूमि पर धड़ल्ले से चल रहा व्यावसायिक कारोबार
रेवेन्यू विभाग भी मौन** कोयला भट्टियां पूरी तरह कृषि भूमि पर संचालित हो रही हैं, जो कानूनन प्रतिबंधित है।
फिर भी न—
- राजस्व विभाग कार्रवाई कर रहा
- न वन विभाग रोक लगा रहा
इस दोहरी चुप्पी से अवैध कोयला माफिया और भी मजबूत हो चुके हैं।
पर्यावरण को गंभीर खतरा — ग्रामीणों का स्वास्थ्य भी प्रभावित
इन भट्टियों से—
- भारी मात्रा में धुआं
- प्रदूषण
- पेड़ों की अवैध कटाई
- मिट्टी और हवा दोनों की गुणवत्ता में गिरावट
जैसी गंभीर समस्याएं सामने आ रही हैं।
कई गांवों में बच्चे और बुजुर्ग सांस की बीमारियों से जूझ रहे हैं, लेकिन किसी अधिकारी ने अब तक इसका संज्ञान नहीं लिया।
वन विभाग का पक्ष — कार्रवाई का दावा
अजमेर जिला फॉरेस्ट अधिकारी पी. बाला मोर्गन ने कहा—
“मुझे अवैध कोयला बनाने वालों की जैसे ही जानकारी मिल रही है, मैं उनके खिलाफ कार्रवाई करवा रहा हूं। दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।”
हालांकि धरातल पर स्थिति इससे उलटी नजर आती है, क्योंकि बड़े स्तर पर अभी भी अवैध कारोबार वैसा ही जारी है।
उपसंहार: अवैध कोयला नेटवर्क पर कब गिरेगी गाज?
अजमेर जिले में अवैध कोयला भट्टियों का विस्तार और प्रशासन की निष्क्रियता एक बड़ा सवाल है।
शिकायतें बढ़ रही हैं, पर्यावरण और स्वास्थ्य को बड़ा नुकसान हो रहा है, और सरकारी खजाने को भी करोड़ों का चूना लग रहा है।
अब देखने वाली बात यह है कि—
- क्या प्रशासन और वन विभाग बड़े माफियाओं पर कार्रवाई की हिम्मत दिखाएंगे?
- क्या कृषि भूमि से यह अवैध कारोबार हटेगा?
- और क्या गांवों में धधकती यह समस्या कभी थमेगी?
यदि जल्द ही सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो यह अवैध व्यापार आने वाले समय में और भी विकराल रूप ले सकता है।