अजमेर: खुलेआम सट्टेबाजी, पुलिस की गिरफ्त में आए खाईवाल, फिर भी चेहरे पर मुस्कान
— अपराधियों में नहीं दिखता कानून का खौफ, पुलिस जांच में जुटी
Edited By : गौरव कोचर
टेलीग्राफ टाइम्स
जुलाई 01,2025
राजस्थान न्यूज | अजमेर: रिपोर्ट हरि प्रसाद शर्मा
राज्य में अपराधियों के बढ़ते हौसले और पुलिस-प्रशासन के प्रति उनकी बेपरवाही का एक और चौंकाने वाला मामला अजमेर से सामने आया है। सोमवार को सिविल लाइन थाना पुलिस ने बस स्टैंड के पीछे सट्टा संचालित कर रहे दो युवकों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया, लेकिन हैरानी की बात यह रही कि गिरफ्तार होने के बावजूद दोनों आरोपी मुस्कराते रहे, जैसे उन्हें पुलिस का कोई डर ही नहीं हो।
मुखबिर की सूचना पर कार्रवाई, मौके से दो गिरफ्तार
सिविल लाइन थाने के हेड कांस्टेबल राजकुमार ने जानकारी दी कि उन्हें मुखबिर से सूचना मिली थी कि बस स्टैंड के पीछे और रेलवे भर्ती बोर्ड के सामने खुलेआम सट्टे की खाईवाली हो रही है। इस पर पुलिस ने तुरंत टीम गठित कर मौके पर दबिश दी। छापेमारी के दौरान दो युवकों – पवन और लेखराज – को सट्टा खेलते हुए पकड़ा गया।
ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर चला रहे थे सट्टा
पुलिस ने आरोपियों के पास से ₹1800 नकद, सट्टे की पर्चियां, हिसाब-किताब की डायरी और अन्य सामान जब्त किया है। प्रारंभिक पूछताछ में खुलासा हुआ है कि आरोपी ‘कल्याण’ और ‘बॉम्बे’ जैसे नामों से ऑनलाइन सट्टा चला रहे थे, जो कि महाराष्ट्र के सट्टा बाजारों से जुड़े हुए हैं।
हंसी के साथ गिरफ्तारी – पुलिस कार्रवाई पर उठे सवाल
गिरफ्तारी के बाद भी दोनों आरोपी पश्चाताप रहित और बेपरवाह नजर आए। पुलिस टीम को देखकर भी उनके चेहरे पर हंसी बनी रही। इससे साफ जाहिर होता है कि उन्हें न तो गिरफ्तारी का डर था, न ही जेल जाने की चिंता – शायद इसलिए कि उन्हें सिस्टम की कमजोरियों का पूरा अंदाजा है और ये भी पता है कि कुछ ही घंटों या दिनों में जमानत पर बाहर आ जाएंगे।
पुलिस के सामने चुनौती – कौन चला रहा है नेटवर्क?
अब पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि इन आरोपियों के पीछे कौन है? कौन चला रहा है यह सट्टे का पूरा नेटवर्क और इसके तार कहां-कहां से जुड़े हुए हैं?
पुलिस अब इस गोरखधंधे में शामिल अन्य सटोरियों, संपर्क सूत्रों और ऑनलाइन माध्यमों की भी गहन जांच कर रही है।
समाज पर असर – बेखौफ अपराधियों से बिगड़ती कानून व्यवस्था
इस घटना ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि जब अपराधी कानून का खुला मज़ाक उड़ाएं और उन्हें गिरफ्तारी का भी डर न हो, तो आमजन की सुरक्षा की क्या गारंटी है?
सट्टा जैसे अपराध न केवल आर्थिक नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि युवाओं को भटकाव, कर्ज और अपराध के दलदल की ओर भी धकेलते हैं।

