अजमेर/ नरेश गुनानी/राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने अजमेर के जवाहरलाल नेहरू (जेएलएन) अस्पताल की व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के लिए सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने अस्पताल प्रशासन और सार्वजनिक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) को निर्देश दिए हैं कि अस्पताल की सभी खामियों को निर्धारित समय सीमा के भीतर दूर किया जाए। इसके साथ ही चेतावनी दी कि यदि लापरवाही पाई गई तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय कर सख्त कार्यवाही की जाएगी।
मंगलवार को सर्किट हाउस में आयोजित जेएलएन अस्पताल प्रशासन और पीडब्ल्यूडी की संयुक्त बैठक की अध्यक्षता करते हुए वासुदेव देवनानी ने समीक्षा की।
बैठक के प्रमुख बिंदु और निर्देश
- हर 15 दिन में संयुक्त निरीक्षण: जेएलएन मेडिकल कॉलेज प्राचार्य, अस्पताल अधीक्षक और पीडब्ल्यूडी के अधिकारी हर 15 दिन में अस्पताल का संयुक्त निरीक्षण करेंगे। इस दौरान कमियों की पहचान कर उनका तत्काल निस्तारण किया जाएगा।
- पीडब्ल्यूडी चौकी 24 घंटे अलर्ट: अस्पताल परिसर स्थित पीडब्ल्यूडी चौकी को 24 घंटे सक्रिय और अलर्ट रखने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि मरम्मत या बिजली संबंधी किसी भी शिकायत का तुरंत समाधान हो सके।
- सफाई ठेकेदार पर गिर सकती है गाज: अस्पताल में 230 से अधिक सफाई कर्मचारी तैनात होने के बावजूद सफाई की शिकायतें मिलने पर देवनानी ने नाराजगी जताई। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो ठेकेदार के खिलाफ कार्यवाही की जाएगी और जरूरत पड़ने पर उसे ब्लैकलिस्ट भी किया जाएगा। कर्मचारियों की संख्या कम या गैरहाजिर मिलने पर भी सख्त कदम उठाए जाएंगे।
- भवन की मरम्मत और एसी जांच: अस्पताल भवन की प्राचीनता को देखते हुए किसी भी अप्रिय घटना से बचाव के लिए पूर्व-उपचारात्मक कार्यवाही करने को कहा गया है। सभी वार्डों की छतों की गुणवत्तापूर्ण वॉटरप्रूफिंग कराने, जाम नालों व नालियों की सफाई कराने और परिसर में लगे 650 से अधिक एयर कंडीशनरों (AC) की जांच कर खराब एसी तुरंत बदलने या सही कराने के निर्देश दिए गए।
- पार्किंग व जनसुविधाओं में सुधार: अस्पताल में आने वाले मरीजों और उनके परिजनों की सुविधा का विशेष ध्यान रखने को कहा गया है। पार्किंग व्यवस्था को लेकर मिल रही शिकायतों पर तुरंत सुधार करने अथवा जिम्मेदार एजेंसी पर कार्यवाही करने के निर्देश दिए गए हैं।
विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि जेएलएन अस्पताल संभाग का सबसे बड़ा चिकित्सा केंद्र है, जहां रोजाना हजारों की संख्या में मरीज पहुंचते हैं। राज्य सरकार द्वारा पर्याप्त वित्तीय और भौतिक संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं, ऐसे में मरीजों या उनके परिजनों को किसी भी प्रकार की असुविधा नहीं होनी चाहिए।