अचरावाला में श्रीराम कथा: सीता हरण और खर-दूषण वध के प्रसंग सुन भाव-विभोर हुए श्रद्धालु
जयपुर | 25 जनवरी 2026
| योगेश शर्मा
डिग्गी-मालपुरा रोड स्थित अचरावाला गांव के रामधाम मंदिर में इन दिनों भक्ति का माहौल है। देवनारायण महाराज के सानिध्य में आयोजित की जा रही नौ दिवसीय श्रीराम कथा एवं यज्ञ के सातवें दिन प्रभु श्रीराम के जीवन से जुड़े मर्मस्पर्शी प्रसंगों का वर्णन किया गया। कथा के दौरान व्यासपीठ से महाराज ने प्रभु के वन गमन, सीता हरण और खर-दूषण वध जैसे अध्यायों को विस्तार से सुनाया, जिसे सुन उपस्थित जनसमूह भाव-विभोर हो गया।

”सेवक के कान समुद्र समान विशाल हों”
देवनारायण महाराज ने चित्रकूट के प्रसंग का वर्णन करते हुए बताया कि जब भगवान श्रीराम वाल्मीकि आश्रम पहुँचे, तब उन्होंने महर्षि वाल्मीकि को अपने चतुर्भुज रूप में दर्शन दिए। प्रभु द्वारा निवास स्थान पूछे जाने पर वाल्मीकि जी ने अत्यंत गूढ़ बात कही। उन्होंने कहा—
”हे प्रभु! आप उस मनुष्य के हृदय में वास करें, जिसके कान सेवा के भाव से भरे हों और जो समुद्र के समान विशाल धैर्य के साथ आपकी महिमा का श्रवण करते हों।”
संतों का प्रेम और शबरी की भक्ति
कथावाचक ने अगस्त्य ऋषि और भगवान श्रीराम के संवाद पर प्रकाश डालते हुए बताया कि भगवान का वन गमन केवल वनवास नहीं, बल्कि संतों को दर्शन देने और भक्तों का उद्धार करने का माध्यम था। उन्होंने शबरी के झूठे बेर ग्रहण करने के प्रसंग के माध्यम से बताया कि ईश्वर केवल प्रेम और भक्ति के भूखे हैं। साथ ही, उन्होंने अगस्त्य मुनि की शक्ति का उल्लेख करते हुए बताया कि वे वही ऋषि हैं जिन्होंने तीन घूँट में संपूर्ण समुद्र का पान कर लिया था।
श्रद्धालुओं का उमड़ा सैलाब
कथा के दौरान भजनों और प्रसंगों पर श्रद्धालु झूमते नजर आए। आयोजन में व्यवस्थाओं को संभालने और धर्म लाभ लेने के लिए कई प्रमुख लोग उपस्थित रहे, जिनमें शामिल हैं:
- नंछी लाल बांगला, गणपत लाल चेला, गोपाल लाल शर्मा, कन्हैयालाल शर्मा।
- रामवतार शर्मा, मोहनलाल शर्मा, हरिमोहन शर्मा, लक्ष्मीनारायण प्रधान।
- महेश सीए, गणेश नारायण प्रधान, मदनलाल शर्मा, राजुलाल चेला, जितेन्द्र बागड़ा और छोटीलाल प्रधान।
आयोजन की झलकियाँ
- यज्ञ और अनुष्ठान: कथा के साथ-साथ मंदिर परिसर में यज्ञ का आयोजन भी किया जा रहा है, जिससे संपूर्ण वातावरण शुद्ध और आध्यात्मिक हो गया है।
- भावपूर्ण वर्णन: सीता हरण के प्रसंग के समय भक्तों की आंखें नम हो गईं, वहीं खर-दूषण वध के दौरान जय श्रीराम के उद्घोष से पंडाल गूंज उठा।

