रिपोर्ट: योगेश शर्मा, जयपुर
जयपुर/नई दिल्ली। अधिवक्ताओं के हितों के लिए समर्पित अग्रणी संस्था अखिल भारतीय संयुक्त अधिवक्ता परिषद (AIJAC) ने अपने संगठन का विस्तार करते हुए राजस्थान में अपनी पकड़ मजबूत की है। परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवसेवक गुप्त के निर्देशानुसार, राष्ट्रीय संगठन मंत्री सुषमा पारीक ने एडवोकेट अथर्व मूंदड़ा को राजस्थान हाईकोर्ट (जयपुर इकाई) के महामंत्री पद पर नियुक्त किया है।
इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी के साथ संगठन को राजस्थान में नए आयाम मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
वरिष्ठ अधिवक्ताओं और प्रबुद्धजनों ने दी बधाई
अथर्व मूंदड़ा की नियुक्ति पर विधि और व्यावसायिक जगत की प्रमुख विभूतियों ने हर्ष व्यक्त किया है। इस अवसर पर वरिष्ठ चार्टर्ड अकाउंटेंट ब्रह्म प्रकाश मूंदड़ा सहित कई वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और उन्हें आशीर्वाद प्रदान किया।
बधाई देने वालों में प्रमुख रूप से एडवोकेट शुभम शर्मा, ललित शर्मा, विनोद कुमार, ओमप्रकाश पारीक, प्रभा राणा, सारिका लोहिया, दीपक बिष्ट, प्रमोद वर्मा, ऋषिता सिंह, मनोज और शैलेन्द्र सिंह शामिल रहे। साथ ही चार्टर्ड अकाउंटेंट श्रेया शारदा और अंकिता शर्मा ने भी इस नियुक्ति का स्वागत किया।
विशेष संदेश: अधिवक्ता भुनेश शर्मा ने दूरभाष के माध्यम से अथर्व मूंदड़ा को विशेष शुभकामनाएं देते हुए विश्वास जताया कि उनका नेतृत्व संगठन को और अधिक सशक्त बनाएगा।
शून्य से शिखर तक: परिषद का गौरवमयी सफर
अखिल भारतीय संयुक्त अधिवक्ता परिषद ने अपने संक्षिप्त कार्यकाल में ‘शून्य से शिखर’ तक का सफर तय कर एक मिसाल पेश की है:
- स्थापना और विकास: वर्ष 2021 में मात्र दो सदस्यों के साथ शुरू हुआ यह कारवां आज 2000 से अधिक सक्रिय सदस्यों के विशाल परिवार में तब्दील हो चुका है।
- कुशल नेतृत्व: राष्ट्रीय संगठन मंत्री सुषमा पारीक की आधारभूत भूमिका और कुशल रणनीतियों के कारण ही संस्था आज देश भर के अधिवक्ताओं के बीच अपनी पहचान बनाने में सफल रही है।
प्रमुख उद्देश्य और भावी संकल्प
यह परिषद केवल एक पेशेवर संगठन नहीं, बल्कि अधिवक्ताओं के अधिकारों की एक बुलंद आवाज बन चुकी है। संस्था के आगामी संकल्पों में निम्नलिखित बिंदु शामिल हैं:
- अधिवक्ता सुरक्षा अधिनियम: देश भर में वकीलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु ‘अधिवक्ता सुरक्षा कानून’ को प्रभावी ढंग से लागू करवाने के लिए निरंतर संघर्ष।
- कल्याणकारी योजनाएं: अधिवक्ताओं के सामाजिक, चिकित्सा और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार करना।
- युवा अधिवक्ताओं का संबल: विधि क्षेत्र में कदम रखने वाले जूनियर अधिवक्ताओं के लिए ‘स्टाइपेंड’ (मानदेय) की मांग को प्रमुखता से उठाना ताकि वे आत्मनिर्भर होकर कार्य कर सकें।
अथर्व मूंदड़ा ने अपनी नियुक्ति के बाद संकल्प जताया कि वे परिषद की नीतियों और उद्देश्यों को धरातल पर उतारने के लिए पूरी निष्ठा से कार्य करेंगे और राजस्थान में अधिवक्ताओं की समस्याओं के समाधान के लिए तत्पर रहेंगे।
