अंबावाड़ी में गूंजी शहनाइयां: सेवा भारती के 15वें सामूहिक विवाह सम्मेलन में 47 जोड़े बने हमसफर

रिपोर्ट योगेश शर्मा 

जयपुर। जानकी नवमी के पावन और अबूझ सावे पर शनिवार को राजधानी के अंबावाड़ी स्थित आदर्श विद्या मंदिर परिसर में ‘लघु भारत’ की झलक देखने को मिली। अवसर था सेवा भारती समिति, जयपुर द्वारा आयोजित 15वें श्रीराम-जानकी सर्वजातीय सामूहिक विवाह सम्मेलन का। इस समारोह में ब्राह्मण, कोली, राजपूत, वाल्मीकि, रैगर, माली और जाटव सहित 15 विभिन्न समाजों के 47 जोड़े वैदिक मंत्रोच्चार के साथ परिणय सूत्र में बंधे। सामाजिक समरसता की मिसाल पेश करते हुए इस सम्मेलन में 7 अंतरजातीय विवाह भी संपन्न हुए।

वैदिक रीति-रिवाजों से संपन्न हुआ पाणिग्रहण

​पीतांबरा पीठ के पं. सत्यनारायण शर्मा और पं. प्यारे मोहन शर्मा के आचार्यत्व में 61 विद्वान पंडितों ने प्रत्येक जोड़े के लिए अलग-अलग बनाई गई वेदिका (मंडप) पर विवाह संपन्न कराया। बारात ढहर के बालाजी स्थित सियारामदास बाबा की बगीची से गाजे-बाजे के साथ रवाना हुई, जहाँ घोड़ियों पर सजे दूल्हों और नाचते बारातियों का आयोजन स्थल पर भव्य स्वागत किया गया।

संतों और गणमान्य जनों का मिला आशीर्वाद

​विवाह स्थल पर राजस्थान के प्रमुख संतों और विभूतियों ने शिरकत कर नव-दंपतियों को उज्जवल भविष्य का आशीष दिया:

  • प्रमुख संत: त्रिवेणी धाम के रामरिछपालदास महाराज, सालासर के विष्णु दत्त पुजारी, महंत हरिशंकर दास वेदांती, गायत्री परिवार के मनु महाराज और धन्ना पीठाधीश्वर बजरंग देवाचार्य सहित कई महामंडलेश्वर।
  • विशिष्ट अतिथि: आरएसएस के क्षेत्रीय प्रचारक निम्बाराम, क्षेत्रीय सेवा प्रमुख शिव लहरी और विधायक बालमुकुंदाचार्य ने जोड़ों पर पुष्प वर्षा कर उन्हें आशीर्वाद दिया।

उपहार और व्यवस्थाएं: घर जैसा माहौल

​सेवा भारती ने आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए माता-पिता की भूमिका निभाते हुए नव-दंपतियों को गृहस्थी का संपूर्ण सामान भेंट किया।

  • उपहार सूची: सोने-चांदी के आभूषण (पायजेब, मंगलसूत्र, बाली), डबल बेड, अलमारी, कूलर, सिलाई मशीन, प्रेस, बर्तन सेट और धार्मिक साहित्य।
  • प्रमाण पत्र: विवाह का पंजीकरण सुनिश्चित करने के लिए मौके पर ही मैरिज सर्टिफिकेट वितरित किए गए।
  • कार्यकर्ता बल: लगभग 500 स्वयंसेवकों ने भोजन, सुरक्षा और अनुशासन की व्यवस्था संभाली।

सामाजिक संदेश: “न जूठन, न कन्या भ्रूण हत्या”

​सम्मेलन केवल विवाह तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यहाँ से दो बड़े सामाजिक संकल्प भी दिलवाए गए:

    1. अन्न का सम्मान: भोजन पांडाल में “उतना ही लो थाली में, व्यर्थ न जाए नाली में” अभियान के तहत कार्यकर्ताओं ने तख्तियां लेकर लोगों को जूठन न छोड़ने के लिए प्रेरित किया।
    2. कुरीतियों पर प्रहार: वक्ताओं ने नव-दंपतियों को कन्या भ्रूण हत्या न करने और परिवार में सामंजस्य बनाए रखने की शपथ दिलाई।

सेवा का गौरवपूर्ण सफर > समिति के अध्यक्ष विष्णु दत्त पुजारी और संयोजक नवल बगड़िया ने बताया कि सेवा भारती अब तक राजस्थान में 33 स्थानों पर कुल 2,691 जोड़ों का विवाह सफलतापूर्वक संपन्न करा चुकी है।

 

​विदाई के समय जब बेटियां विदा हुईं, तो आयोजन स्थल पर मौजूद परिजनों के साथ-साथ सेवा भारती के कार्यकर्ताओं की आंखें भी नम हो गईं। अभिभावकों ने सेवा भारती के इस पुनीत कार्य की मुक्त कंठ से सराहना की।

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