छत्तीसगढ़
अंदकुरी गांड़ा समाज की खंड महासभा सम्पन्न: सामाजिक एकता और परंपराओं के प्रति समर्पण का अद्भुत उदाहरण
Edited By: गणपत चौहान/छत्तीसगढ़
टेलीग्राफ टाइम्स
मई 30, 2025
कांकेर।छत्तीसगढ़ । कांकेर जिले के ग्राम चनार की पावन धरा पर अंदकुरी गांड़ा समाज समन्वय समिति द्वारा आयोजित दो दिवसीय खंड महासभा 28 मई से 29 मई 2025 तक अत्यंत श्रद्धा और सामाजिक सौहार्द के साथ सम्पन्न हुई। इस आयोजन में समाज के सभी प्रमुख प्रकोष्ठों—युवा प्रकोष्ठ, महिला प्रकोष्ठ एवं मुख्य समिति के पदाधिकारियों समेत हजारों की संख्या में समाजजन शामिल हुए।
पहला दिन: परंपरा और विमर्श का संगम
कार्यक्रम का शुभारंभ 28 मई को संध्या 6 बजे समाज के पारंपरिक प्रतीक ध्वज शिष्टाचार के साथ हुआ, जिसमें मुख्य अतिथि ग्राम के गायता पुजारी थे। इसके उपरांत रात्रि भोज के बाद 7 बजे से प्रथम पाली की गोष्ठी प्रारंभ हुई, जिसकी अध्यक्षता प्रांताध्यक्ष श्री सुशील दरों ने की। प्रांतीय संरक्षक श्री प्रदीप कुलदीप, चरण सिंह गंधर्व तथा अन्य पदाधिकारियों की उपस्थिति में समाज के आराध्य बूढ़ा देव की पूजा-अर्चना कर कार्यक्रम को विधिवत आरंभ किया गया।

रात्रि 3 बजे तक चली इस अनवरत गोष्ठी में समाज के समक्ष महत्वपूर्ण मुद्दों पर गहन विमर्श हुआ। प्रांतीय एवं जिला पदाधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता, तथा स्वजातीय बंधुओं ने समाज के वर्तमान, चुनौतियाँ एवं भविष्य की दिशा पर अपने विचार रखे।
दूसरा दिन: निर्णय और सामाजिक संकल्प
29 मई को सुबह 10 बजे सभा का दूसरा चरण प्रारंभ हुआ। समाज की नियमावली में कुछ संशोधनों को आमसभा के समक्ष प्रस्तुत किया गया, जिन पर सर्वसम्मति से विचार हुआ।
समापन समारोह: गरिमा और गौरव का प्रतीक
दोपहर 2 बजे समापन कार्यक्रम आयोजित हुआ, जिसकी शुरुआत विधायक श्री आशाराम नेताम (कांकेर विधानसभा) द्वारा ध्वज वंदन एवं बूढ़ा देव की पूजा के साथ की गई। इस अवसर पर समाज के प्रांतीय अध्यक्ष श्री सुशील दरों ने अध्यक्षता की।
समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में जनपद अध्यक्ष नरहरपुर श्री सोमन कावड़े, जनपद सदस्य सुश्री शिल्पा साहू, ग्राम सरपंच श्री रविंद्र कुमार कावड़े, तथा समाज के प्रमुख पदाधिकारी—श्री बलिराम मरकाम, श्री प्रदीप कुलदीप, चरण सिंह गंधर्व, जिलाध्यक्ष श्री पप्पू मरकाम, श्री चिंतुराम रोशन, श्री करण कोर्राम, श्री अनिल कोर्राम, महेश दरों, श्री बजारूराम सोरी एवं अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
विशेष उल्लेखनीय रही समाज की मातृशक्ति की भारी भागीदारी, जिन्होंने पूरे आयोजन में सक्रिय भूमिका निभाई और आयोजन को सफल बनाया।

