अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026: दुनिया को ‘Fit’ और अर्थव्यवस्था को ‘Hit’ कर रहा है योग; ₹12 लाख करोड़ के पार पहुंची ग्लोबल इंडस्ट्री

प्रीति बालानी 

नई दिल्ली/कोलकाता: 21 जून 2026 को पूरी दुनिया 12वां अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मना रही है। इस साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोलकाता के ऐतिहासिक रेड रोड से वैश्विक स्तर पर इस उत्सव का नेतृत्व किया। लेकिन अब योग सिर्फ सुबह-शाम पार्क या स्टूडियो में की जाने वाली शारीरिक और मानसिक साधना तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह एक अभूतपूर्व ‘आर्थिक चमत्कार’ (Economic Miracle) का रूप ले चुका है।

​हालिया वैश्विक रिपोर्ट्स के अनुसार, दुनिया को निरोगी बनाने के साथ-साथ योग आज ग्लोबल इकोनॉमी की सेहत भी सुधार रहा है। वैश्विक योग बिजनेस का कुल मार्केट साइज 12 लाख करोड़ रुपये ($138+ Billion) के पार पहुंच चुका है, जिसके साल 2033 तक 25 लाख करोड़ रुपये से अधिक होने की उम्मीद है। आइए समझते हैं कि कैसे योग ने एक विशाल ग्लोबल इंडस्ट्री का रूप ले लिया है।

​1. ₹12 लाख करोड़ का आंकड़ा: कैसे हुआ यह आर्थिक चमत्कार?

​शुरुआती दौर में योग को एक मुफ्त या बेहद कम खर्च वाली गतिविधि माना जाता था, लेकिन पिछले एक दशक में इसके व्यवसायीकरण और वैश्विक स्वीकार्यता ने इसे ‘इकोनॉमिक पावरहाउस’ बना दिया है।

  • वेलनेस टूरिज्म का उछाल: विदेशी नागरिक बड़ी संख्या में भारत के ऋषिकेश, केरल, कर्नाटक, गोवा और उत्तराखंड जैसे योग-पर्यटन (Yoga Tourism) केंद्रों का रुख कर रहे हैं।
  • महिला उपभोक्ताओं की बड़ी हिस्सेदारी: डेटा के अनुसार, योग मार्केट के कुल उपभोक्ताओं में लगभग 70% भागीदारी महिलाओं की है। हालांकि, ‘पावर योगा’ और ‘कॉरपोरेट वेलनेस’ के चलते अब पुरुषों की संख्या भी 30% के पार पहुंच रही है।
  • उम्र का समीकरण: 30 से 50 वर्ष का कामकाजी वर्ग (लगभग 43%) तनाव प्रबंधन और एंग्जायटी से राहत के लिए योग पर सबसे ज्यादा खर्च कर रहा है।

​2. योग के विभिन्न स्तंभ जो अर्थव्यवस्था को दे रहे हैं रफ्तार

​योग अर्थव्यवस्था केवल क्लासेस तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके कई सहायक उद्योग खड़े हो चुके हैं:

सेगमेंट

विवरण

आर्थिक योगदान

योग एपेरल और वियर

योग पैंट्स, जेंडर-न्यूट्रल और ऑर्गेनिक कपड़े

लाइफस्टाइल फैशन का बड़ा हिस्सा, अरबों डॉलर का कारोबार।

योग एक्सेसरीज

योगा मैट, कुशन, ब्लॉक्स और बेल्ट्स

अकेले अमेरिका में योगा मैट का मार्केट कई बिलियन डॉलर का है।

डिजिटल योग (Apps)

ऑनलाइन कोर्सेज, वेलनेस ऐप्स (Cult.fit, HealthifyMe)

टियर-2 और टियर-3 शहरों में सबसे तेजी से बढ़ता सेगमेंट।

कॉरपोरेट वेलनेस

बहुराष्ट्रीय कंपनियों (MNCs) द्वारा कर्मचारियों के लिए योग सत्र

कंपनियों के स्वास्थ्य बजट का एक बड़ा हिस्सा अब योग को जाता है।

विशेष पहल: इस अवसर पर ‘खादी इंडिया’ ने पारंपरिक खादी फैब्रिक से बना ‘स्वधा’ वेलनेस वियर कलेक्शन लॉन्च किया है, जो देश के ग्रामीण बुनकरों और खादी संस्थाओं को सीधे आर्थिक लाभ पहुंचा रहा है।

 

​3. डिजिटल क्रांति और ऑफलाइन कोर्सेज का दबदबा

​भले ही डिजिटल क्रांति के बाद वेलनेस ऐप्स और ऑनलाइन क्लासेस की मांग तेजी से बढ़ी हो, लेकिन बाजार में असली दबदबा आज भी ऑफलाइन योग कोर्सेज (लगभग 62% से 73% हिस्सेदारी) का है। लोग व्यक्तिगत मार्गदर्शन, सही पोस्चर सुधार (Hands-on correction) और ग्रुप एनवायरनमेंट के लिए सर्टिफाइड योग स्टूडियोज को प्राथमिकता दे रहे हैं और इसके लिए मोटी फीस देने को तैयार हैं।

​भविष्य की तस्वीर: भारत की ‘सॉफ्ट पावर’ से ग्लोबल ब्रांडिंग

​2015 में शुरू हुए अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस ने भारत को दुनिया के सामने एक ‘सॉफ्ट पावर’ के रूप में स्थापित किया है। योग की बढ़ती लोकप्रियता से न केवल देश में रोजगार के लाखों नए अवसर (योग ट्रेनर, थेरेपिस्ट, डाइटिशियन के रूप में) पैदा हो रहे हैं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत की छवि एक ‘ग्लोबल वेलनेस हब’ की बन चुकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में योग की यह धुंआधार आर्थिक रफ्तार दुनिया के कई बड़े देशों की जीडीपी ग्रोथ रेट को भी पीछे छोड़ देगी।

​योग के बढ़ते वैश्विक व्यापार और आर्थिक फायदों को और गहराई से समझने के लिए आप Economy Growth By Yoga वीडियो देख सकते हैं, जिसमें बताया गया है कि कैसे यह प्राचीन कला एक बड़े ब्रांड और बिज़नेस मॉडल में तब्दील हो चुकी है।

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