नई दिल्ली/ गौरव कोचर/अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस के अवसर पर केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने भारत की उल्लेखनीय वन्यजीव संरक्षण यात्रा को रेखांकित किया है। मंत्रालय के अनुसार, निरंतर संरक्षण प्रयासों, बेहतर आवास सुरक्षा, वैज्ञानिक निगरानी तकनीक और स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी के चलते भारत में बाघों की संख्या में ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज की गई है।
आंकड़ों में भारत की ऐतिहासिक उपलब्धि
मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, भारत में बाघों की आबादी में साल दर साल अभूतपूर्व सुधार हुआ है:
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वर्ष |
बाघों की अनुमानित संख्या |
स्थिति / बदलाव |
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2006 |
1,411 |
चिंताजनक स्तर (संरक्षण की कड़ी आवश्यकता) |
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2022 |
3,682 |
रिकॉर्ड वृद्धि (160% से अधिक का इजाफा) |
मुख्य बिंदु: वर्तमान में भारत दुनिया के 70% से अधिक जंगली बाघों का प्राकृतिक आवास है, जो वैश्विक जैव विविधता (Biodiversity) के लिए एक मिसाल है।
इस सफलता के मुख्य आधार
भारत में बाघों की संख्या को दो गुने से अधिक करने में निम्नलिखित रणनीतियों ने प्रमुख भूमिका निभाई है:
- प्रोजेक्ट टाइगर और टाइगर रिजर्व विस्तार: भारत में ‘प्रोजेक्ट टाइगर’ के तहत नेटवर्क को लगातार मजबूत किया गया है। आज देश में 50 से अधिक टाइगर रिजर्व हैं जो बाघों को एक सुरक्षित प्राकृतिक आवास प्रदान करते हैं।
- वैज्ञानिक निगरानी तकनीक (M-STrIPES): कैमरा ट्रैपिंग, जीपीएस और डेटा एनालिसिस जैसी आधुनिक वैज्ञानिक प्रणालियों के ज़रिए बाघों की गिनती और उनकी गतिविधियों पर कड़ी नज़र रखी जाती है।
- सामुदायिक भागीदारी: जंगलों के आसपास रहने वाले स्थानीय समुदायों और जनजातियों को संरक्षण अभियानों में शामिल किया गया है, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष में कमी आई है और अवैध शिकार (Poaching) पर रोक लगी है।
आगे की राह
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का यह मॉडल वन्यजीव संरक्षण की एक बड़ी सफलता की कहानी बन चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस गति को बनाए रखने के लिए जंगलों के गलियारों (Corridors) की सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से वन्यजीवों का बचाव करना आगामी समय की मुख्य प्राथमिकता होगी।