अंग प्रत्यारोपण और स्वास्थ्य सेवा में AI के उपयोग पर एम्स भुवनेश्वर में क्षेत्रीय कार्यशाला आयोजित

आसिम अमिताव बिस्वाल 

भुवनेश्वर, 31 मार्च 2026

​अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) भुवनेश्वर ने राष्ट्रीय चिकित्सा विज्ञान अकादमी (NAMS) के सहयोग से ‘अंग प्रत्यारोपण और स्वास्थ्य सेवा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के उपयोग’ पर एक महत्वपूर्ण क्षेत्रीय कार्यशाला (CME) का सफल आयोजन किया। इस कार्यक्रम में चार राज्यों—ओडिशा, पश्चिम बंगाल, बिहार और झारखंड—के 300 से अधिक चिकित्सकों और विशेषज्ञों ने भाग लिया।

समाचार के मुख्य बिंदु:

  • AI बनेगा उत्प्रेरक: अंग प्रत्यारोपण की प्रक्रिया को व्यवस्थित और तेज करने में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) एक गेम-चेंजर साबित होगा।
  • वैश्विक रैंकिंग: भारत अंग प्रत्यारोपण के क्षेत्र में विश्व का तीसरा सबसे अग्रणी देश बन गया है। पिछले वर्ष देश में लगभग 20,000 प्रत्यारोपण किए गए।
  • क्षेत्रीय उत्कृष्टता केंद्र: एम्स भुवनेश्वर जल्द ही अंग प्रत्यारोपण और AI के लिए एक ‘क्षेत्रीय उत्कृष्टता केंद्र’ (Regional Centre of Excellence) स्थापित करेगा।

प्रत्यारोपण में AI की भूमिका

​प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के अतिरिक्त सचिव श्री सुभाशीष पंडा ने उद्घाटन सत्र में कहा कि AI विशाल डेटाबेस को एकीकृत कर विशेषज्ञों को सटीक निर्णय लेने में मदद करेगा। उन्होंने बताया कि AI के माध्यम से डोनर-रेसिपिअंट मैचिंग (दाता-ग्राही मिलान), अंगों की उपलब्धता की रियल-टाइम ट्रैकिंग और तेजी से अंग पहुँचाने के लिए परिवहन मार्गों को अनुकूलित (Optimize) करना आसान हो जाएगा।

चुनौतियां और जागरूकता

​संबोधन के दौरान यह तथ्य सामने आया कि भारत में वार्षिक 5 लाख अंगों की आवश्यकता है, जबकि केवल 3% मांग ही पूरी हो पाती है। वर्तमान में 82,000 से अधिक रोगी सक्रिय प्रतीक्षा सूची में हैं। श्री पंडा ने जोर दिया कि 82% अंग दान जीवित दाताओं द्वारा किया जाता है, जिसमें महिलाएं सबसे बड़ा समूह हैं। उन्होंने सरकारी संस्थानों की भागीदारी बढ़ाने और जन जागरूकता पर बल दिया।

साझा प्रयास और संकल्प

​एम्स भुवनेश्वर के कार्यकारी निदेशक डॉ. आशुतोष विश्वास ने राष्ट्रीय नीति रणनीतियों के साथ समन्वय करने और डोनर पूल का विस्तार करने की आवश्यकता जताई। कार्यक्रम में नीति आयोग के सदस्य प्रो. वी. के. पॉल ने भी वर्चुअल माध्यम से शिरकत की और देश में किफायती चिकित्सा शिक्षा व स्वास्थ्य सेवाओं की प्रगति की सराहना की।

विशिष्ट उपस्थिति

​कार्यशाला में एम्स ऋषिकेश, एम्स अवंतीपोरा, एम्स कल्याणी, एम्स पटना, आईआईटी भुवनेश्वर और पीजीआईएमईआर चंडीगढ़ जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के निदेशकों और विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में अंग प्रत्यारोपण के नैतिक व कानूनी पहलुओं, एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस और स्वास्थ्य सेवा में तकनीकी नवाचारों पर विस्तृत चर्चा की गई।

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