ʻचरागाह प्रबंधन एवं विलायती बबूल उन्मूलनʼ पर राज्य स्तरीय कार्यशाला आयोजित – प्रदेश में शीघ्र शुरू होगी विलायती बबूल हटाने की प्रक्रिया – पंचायती राज मंत्री
report – sunil sharma, telegraph times
11 नवम्बर 2025, 07:23 PM
जयपुर, 11 नवम्बर। प्रदेश में विलायती बबूल (प्रोसोपिस जुलिफोरा) के संपूर्ण उन्मूलन के लिए मंगलवार को जयपुर के दुर्गापुरा स्थित महाराणा प्रताप ऑडिटोरियम में ʻचरागाह प्रबंधन एवं विलायती बबूल उन्मूलनʼ विषय पर राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।
कार्यशाला का उद्देश्य चरागाह संरक्षण एवं पुनर्स्थापना, विलायती बबूल का समूल उन्मूलन और जैव विविधता संरक्षण रहा।
कार्यशाला की अध्यक्षता करते हुए पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर ने कहा कि गौ माता का संरक्षण और संवर्धन आवश्यक है। उन्होंने कहा कि गौ माता के बिना मानवता का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा। गौ माता पर्यावरण का एक महत्वपूर्ण घटक है। उन्होंने बताया कि रासायनिक खादों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की उर्वरता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है, जबकि गौ माता का गोबर एक प्राकृतिक और अचूक उपाय है जो मिट्टी को पुनः जीवन और पोषण प्रदान करता है। इसलिए गौ माता के विचरण के लिए चरागाहों का कुशल प्रबंधन आवश्यक है।
मदन दिलावर ने कहा कि गोचर भूमि को विलायती बबूल मुक्त करने से पारंपरिक वनस्पतियों को बढ़ावा मिलेगा। यह पौधा ग्रामीण भूमि, चरागाहों और पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा बन चुका है। इसकी गहरी जड़ें और अत्यधिक जल सोखने की क्षमता भू-जल स्तर में गिरावट और मृदा की उर्वरकता में कमी का कारण बन रही हैं। इसके चलते पारंपरिक स्थानीय पौधों की कई प्रजातियाँ नष्ट हो चुकी हैं।
उन्होंने बताया कि जल्द ही प्रदेश के प्रत्येक गांव में चरणबद्ध तरीके से अभियान के रूप में विलायती बबूल के उन्मूलन का कार्य प्रारंभ किया जाएगा। राज्य सरकार का लक्ष्य केवल बबूल को काटना नहीं, बल्कि इसकी जड़ों को पूरी तरह समाप्त करना है ताकि यह दोबारा न उग सके।
पंचायती राज राज्य मंत्री ओटाराम देवासी ने कहा कि चरागाह भूमि में विलायती बबूल की वृद्धि से स्थानीय वनस्पतियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। यह पौधा हमारे चरागाह, कृषि भूमि और जलस्रोतों के लिए गंभीर खतरा बन गया है, जिसे जड़ से खत्म करना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
पंचायती राज विभाग के शासन सचिव डॉ. जोगा राम ने बताया कि राज्य सरकार चरागाहों के प्रबंधन और विलायती बबूल उन्मूलन के माध्यम से पारंपरिक वनस्पतियों को बढ़ावा देने की दिशा में प्रभावी कार्य कर रही है। शीघ्र ही प्रदेश में विलायती बबूल उन्मूलन के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि स्थानीय स्तर पर पारंपरिक वनस्पतियों को बढ़ावा देने के लिए राज्य में 150 बीज बैंक स्थापित किए गए हैं।
कार्यशाला में विषय विशेषज्ञों और गौ-सेवकों से संवाद कर विलायती बबूल के उन्मूलन तथा चरागाह प्रबंधन के लिए सुझाव लिए गए। इससे पहले पंचायती राज मंत्री ने संत-महंतों का आशीर्वाद लेकर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस दौरान प्रदर्शनी में विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉल्स का अवलोकन किया गया।
कार्यक्रम में विधायक प्रतापपुरी, प्रदेश के विभिन्न कृषि विश्वविद्यालयों के कुलपति, भारतीय किसान संघ के सह संगठन मंत्री गजेंद्र सिंह सहित साधु-महंत, गौ सेवक, विषय विशेषज्ञ तथा पंचायती राज, वन विभाग सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।